सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय की हड़ताल के समाधान के लिए शिक्षक संघ की पहल

Adiwasi

दुमका: सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय (SKMU) के शिक्षक संघ के प्रतिनिधियों ने विश्वविद्यालय और महाविद्यालय के कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण उत्पन्न समस्याओं के समाधान के लिए पहल की है। शिक्षक प्रतिनिधियों ने कुलपति प्रोफेसर बिमल प्रसाद सिंह और हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों से मुलाकात कर इस गंभीर मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की।

शिक्षक संघ की अपील:
शिक्षक संघ के प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया कि कर्मचारियों की समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाना चाहिए, ताकि संथाल परगना प्रमंडल में उच्च शिक्षा की व्यवस्था पुनः सुचारू रूप से संचालित हो सके। इसके लिए समस्या के समाधान पर विचार-विमर्श और आवश्यक बैठकें करने का निर्णय भी लिया गया।

शिक्षा प्रणाली पर पड़ रहा है असर:
शिक्षक संघ ने इस बात पर चिंता जताई कि सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय संथाल परगना क्षेत्र में उच्च शिक्षा का एकमात्र संस्थान है। पैंतालीस दिनों से जारी हड़ताल से न केवल विश्वविद्यालय की शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि यह क्षेत्र के प्रति सौतेले व्यवहार और उपेक्षा को भी दर्शाता है।

सरकार से अपील:
शिक्षक प्रतिनिधियों ने मानव संसाधन एवं उच्च शिक्षा विभाग से अपेक्षा जताई कि कर्मचारियों की समस्याओं को संवेदनशीलता से हल किया जाए। उन्होंने सरकार से यह आग्रह किया:

  1. तत्काल हस्तक्षेप: सरकार को इस मुद्दे पर तुरंत संज्ञान लेना चाहिए।
  2. कैम्प लगाकर समाधान: उच्च शिक्षा एवं तकनीकी विभाग को विश्वविद्यालय परिसर में कैम्प लगाकर कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए।
  3. “आपकी सरकार आपके द्वार” वादा पूरा करें: सरकार की इस योजना के तहत छात्रों और समाज को उच्च शिक्षा का समुचित लाभ मिल सके।

शिक्षक संघ के प्रतिनिधि:
इस बैठक में सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय शिक्षक संघ, आदिवासी शिक्षक संघ, और अखिल भारतीय शैक्षिक महासंघ के प्रतिनिधि शामिल हुए। प्रमुख नाम हैं:

  • डॉ. अंजुला मुर्मू
  • डॉ. सुजीत कुमार सोरेन
  • डॉ. राजीव रंजन
  • डॉ. मेरी मार्ग्रेट टुडू
  • डॉ. राजीव केरकेट्टा
  • डॉ. स्वेता मरांडी
  • डॉ. सैमुएल किस्कू
  • डॉ. प्रीति किरण हांसदा

समस्या का समाधान जरूरी:
शिक्षक संघ ने स्पष्ट किया कि इस क्षेत्र में उच्च शिक्षा का भविष्य सरकार की संवेदनशीलता और तत्परता पर निर्भर है। यदि इस हड़ताल का समाधान जल्द नहीं निकाला गया, तो इसका गहरा असर छात्रों और शिक्षा व्यवस्था पर पड़ेगा।

शिक्षक संघ ने सरकार से यह अपील की कि वह क्षेत्र की उच्च शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए आवश्यक कदम उठाए।

The short URL of the present article is: https://bharatbulletin.in/j0dv

Leave a Comment

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *