आमजन परेशान न हों,शंका हो तो करें शिकायत
गिरिडीह। जिले के डुमरी अनुमंडल क्षेत्र में इन दिनों फर्जी पत्रकारों के गैंग ने सक्रिय रुप ले रखा है।अगर आप तनिक भी चुके तो नुकसान भी हो सकता है।यह गैंग सुबह से लेकर शाम तक आला अधिकारियों की जी हुजूरी में लगा रहता है। साथ ही इन कार्यालयों में चक्कर काटने वाले पीड़ितों को भी यह गलत फहमी भी हो जाती है कि यह लोग ही पत्रकार हैं। अक्सर लोग इनकी जद में फंस जाते हैं जो भी फंसा, उसका कल्याण ये लोग कुछ दिनों में कर ही देते है। इनमें से कई चमचमाती लग्जरी कारों पर प्रेस लिखकर लोगों को चूना लगाने में संलग्न हैं।आपको यह पत्रकार बड़े अधिकारियों के ऑफिस के आसपास या थाना के पास मंडराते नजर आ जायेंगे। इसमें कुछ अपराधी प्रवृत्ति के लोग भी शामिल हो गए हैं, जिनकी हिस्ट्री शीट तक निकाली जा सकती है, वह भी पत्रकारिता की खाल ओढ़ कर अधिकारियों को गुमराह करने में लगे हैं। जल्द ही जिम्मेदारों ने इस पर ध्यान नही दिया तो और भी बुरा दौर शुरु हो सकता है। एक दौर था जब पत्रकार ने अपनी लेखनी के जरिए समाजिक हित में बड़े आंदोलनों को जन्म दिया व समाज ने पत्रकार को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना। लेकिन आज स्थितियां लगातार बदल रही हैं। पत्रकारिता पर व्यवसायिकता हावी हो गई है, जिस कारण पत्रकारिता के स्तर में लगातार गिरावट आ रही है। निजी फायदे के लिए सोशल मीडिया पर फेक न्यूज भेजने का चलन बढ़ा है, जिसका सीधा असर समाज पर पड़ रहा है व समाज में पत्रकार की छवि धूमिल हो रही है। एकस्वर में पत्रकारिता के सिद्धातों का पालन करते हुए पत्रकारिता के मूल स्वरूप को बनाये रखने पर जोर दिया जाए। साथ ही समाज की कठिन समस्याओं पर भी अपनी लेखनी के माध्यम से सरकारों को चेताने की बात कही गयी है, ताकि मानव जीवन के लिए कठिन होती जा रही समस्याओं का समय रहते ही निराकरण हो सके।किसी भी इमारत या ढांचे को खड़ा करने के लिए चार स्तंभों की आवश्यकता होती है उसी प्रकार लोकतंत्र रूपी इमारत में विधायिका, न्यायपालिका, कार्यपालिका को लोकतंत्र के तीन प्रमुख स्तम्भ माना जाता है जिनमें चौथे स्तम्भ के रूप में मीडिया को शामिल किया गया है| किसी देश में स्वतंत्र व निष्पक्ष मीडिया उतनी ही आवश्यक व महत्वपूर्ण है जितना लोकतंत्र के अन्य स्तम्भ इस प्रकार पत्रकार समाज का चौथा स्तम्भ होता है जिसपर मीडिया का पूरा का पूरा ढांचा खड़ा होता है जो नीव का कार्य करता है यदि उसी को भ्रष्टाचार व असत्य रूपी घुन लग जाए तो मीडिया रूपी स्तम्भ को गिरने से बचाने व लोकतंत्र रूपी इमारत को गिरने से बचाने में खासी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। एक समय था जब एक पत्रकार की कलम में वो ताक़त थी कि उसकी कलम से लिखा गया एक-एक शब्द देश की राजधानी में बैठे नेता, राजनेता, व अधिकारियों की कुर्सी को हिला देता था, पत्रकारिता ने हमारे देश की आज़ादी में अहम् भूमिका निभाई, देश जब गुलाम था तब अंग्रेजी हुकूमत के पाँव उखाड़ने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से अनेक समाचार पत्र, पत्रिकाओं का सम्पादन शुरू किया गया।किंतु वर्तमान दौर दुखदायी हो गया है।