नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने की लगाई गुहार
गोड्डा। व्यवहार न्यायालय, गोड्डा के वरिष्ठ अधिवक्ता सह लोक मंच सचिव सर्वजीत झा ‘अन्तेवासी’ ने रांची उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन प्रेषित कर व्यवहार न्यायालय में व्याप्त अनियमितता एवं उच्च न्यायालय के आदेश की लगातार हो रही अवमानना की ओर ध्यान आकृष्ट किया है। उन्होंने उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से नागरिकों के संवैधानिक अधिकार की रक्षा करने की गुहार लगाई है। अधिवक्ता श्री झा ने सर्वप्रथम राजाभीठा कांड संख्या 29/022 का उदाहरण देते हुए लिखा है कि उनके मुवक्किल को जमानत दी गई थी। बड़ा दिन की छुट्टी की वजह से आदेश संबंधी फैक्स 13 दिनों बाद मिली। 4 जनवरी को आदेशानुसार बंध पत्र को जांचोपरांत गोड्डा कारा अधीक्षक के पास भेजा गया, परन्तु काराधीक्षक ने दोनों को रिहा करने से इनकार कर दिया। बन्दी द्वय के अधिवक्ता होने के नाते जब श्री झा ने फोन पर काराधीक्षक से रिहा नहीं किये जाने की वजह को जानने का प्रयास किया तो उन्होंने यह कहते हुए कि वह वकील-तकील को नहीं जानते, बात करने से भी इन्कार कर दिया। श्री झा ने कहा है कि यह पहला अवसर नहीं है जब उक्त काराधीक्षक द्वारा अधिवक्ता की गरिमा को ठेस पहुंचाने का काम किया गया है। इसके पूर्व भी इसी बात को लेकर उनसे माननीय जिला जज प्रथम द्वारा स्पष्टीकरण पूछे जाने के पश्चात भविष्य में ऐसी गलती नहीं किये जाने के शपथ पर इन्हें माफी मिली है। सक्षम पदाधिकारी से जांच पर इस तरह के अनेक मामले सामने आएंगे।
श्री झा ने माननीय उच्च न्यायालय को सुझाव प्रेषित करते हुए आगे लिखा है कि बन्ध पत्र के मामले में आधार या मतदाता पहचान पत्र को ही पर्याप्त माना जाए। गौरतलब है कि कोरोना काल में व्यक्तिगत बन्ध पत्र को ही पर्याप्त माना जाता था। श्री झा ने उक्त सुझाव के अलावा बंदी को रिहाई आदेश के 24 घण्टे के भीतर रिहा किए जाने के लिए अन्य सुझाव भी प्रेषित किए हैं। उन्होंने कहा है कि वाले केस में किशोर विधि विरुद्ध बालक को भी सम्बंधित न्यायालय में आत्मसमर्पण करना पड़ता है, जो पहले नहीं होता था। उन्हें कथित सुधार गृह भेजा जाता है, जिसे मैं जेल ही मानता हूँ। ऐसी परिस्थिति में बच्चे की पढ़ाई, परीक्षा एवं आत्मसम्मान पर गहरा आघात पहुंचता है। श्री झा ने कहा है कि जब स्कूल द्वारा प्रदत्त प्रमाण पत्र है तो फिर ऐसा विरोधाभास क्यों? आगे उन्होंने कहा है कि केस डायरी समय पर नहीं पहुंचना भी न्याय के राह में बहुत बड़ी विसंगति है। उन्होंने प्रत्येक जिला न्यायालय में अनिवार्य रूप से शिकायत पेटी की जरूरत पर बल दिया है। मृतप्राय विजिलेंस कमिटी को भी पुनर्जीवित किये जाने की मांग की है। श्री झा ने आवेदन के अंत में स्टाम्प भेंडर द्वारा जाली टिकट धड़ल्ले से बेचे जाने पर भी कड़ाई से रोक की मांग की है।
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