शिक्षा विभाग एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सुस्ती की वजह से स्कूलों में तड़ित चालक यंत्र की व्यवस्था नहीं की गई है।
संवाददाता/ जामताड़ा I झारखंड में 25 जून से मानसून के प्रवेश होने से यहां के लोगों को भीषण तपती गर्मी से निजात मिल गया है परंतु मॉनसून के साथ-साथ आकाश बिजली वज्रपात की संभावनाएं भी बढ़ गई है बताते चलें कि मौसम विभाग के द्वारा लगातार आकाशी बिजली वज्रपात बारिश होने का अलर्ट लोगों को मैसेज के द्वार तो मिल जाता है, परंतु इससे बचने और जान माल की हानि ना हो इस पर किसी भी विभाग के द्वारा कोई पहल नहीं किया गया है।,वही जामताड़ा जिले के प्रखंड क्षेत्र में विभिन्न विद्यालयों में अध्ययनरत सैकड़ों बच्चों पर बरसात के मौसम में आसमानी बिजली का खतरा मंडराता रहता है। यहां के किसी भी विद्यालय में वज्रपात से कोई बड़ी दुर्घटना कभी भी घट सकती है। शिक्षा विभाग एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सुस्ती की वजह से स्कूलों में तड़ित चालक यंत्र की व्यवस्था नहीं की गई है। जबकि यहां अक्सर वज्रपात की घटनाएं घटित होती रहती हैं। लेकिन प्रखंड के 221 सरकारी एवं निजी विद्यालयों में वज्रपात से बचने-बचाने के लिए कोई मुकम्मल व्यवस्था ही नहीं है। लगभग कुछेक वर्ष पहले कुछ विद्यालयों में नया भवन बनवाते समय विभागीय दिशा निर्देशानुसार तड़ित चालक लगे थे। इनमें से अधिकतर चोरी हो गए या गिर गए। इस संबंध में प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी सुखदेव यादव ने बताया कि किसी भी सरकारी विद्यालय एवं निजी विद्यालय में तड़ित चालक यंत्र नहीं लगा है। कुछ तो चोरी हो गया, कितना बचा हुआ है उसका रिपोर्ट मंगाने पर पता चलेगा। अगर कहीं है तो,सही तरीके से नहीं लगे हैं। सरकार की ओर से विद्यालयों में तड़ित चालक यंत्र लगवाने के लिए कोई राशि अलग से उपलब्ध नही कराई गई है। बरसात के दिनों में बहुत ही जरूरी है।
मौसम विभाग मानसून के बाद वज्रपात को लेकर लगातार अलर्ट जारी करता रहता है ।इसके बावजूद भी लोगों की मौत का आंकड़ा कम नहीं होता है। जामताड़ा जिले में भी प्रत्येक साल इन दिनों बरसात के मौसम में वज्रपात से दर्जनों जान जाती है। कहीं मनुष्य जीवन की तो किसी क्षेत्र में जान-माल की नुकसान हो जाता है। वज्रपात की चपेट में आने की संभवतः कारण खुले और गीले मैदानों ,पेड़ों की ओट या खंभे के नीचे जाने से खतरा बढ़ जाता है। बारिश के दौरान वाहन विशेष रुप से दो पहिया वाहन चलाने से मना किया जाता है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी जाती है ।इन सभी सावधानियों से अपनाने से वज्रपात से बचा जा सकता है।
मुआवजे का प्रावधान मुआवजे के लिए कैसे कर सकते हैं आवेदन किया है जरूरी प्रक्रिया
वज्रपात से अगर किसी की संपत्ति को नुकसान पहुंचता है या कोई मारा जाता है, तो मुआवजे के लिए थाना में प्राथमिकी दर्ज कर पोस्टमार्टम रिपोर्ट का होना जरूरी है। अंचल अधिकारी या जिले के आपदा प्रबंधन पदाधिकारी या उपायुक्त को लिखित आवेदन देकर मुआवजा संबंधित राहत कोष के लिए अविलंब संपर्क करना चाहिए।
किस परिस्थिति में कितना मिलता है मुआवजा
वज्रपात से एक व्यक्ति की मौत पर मृतक के आश्रितों को चार लाख का मुआवजा मिलता है।
वज्रपात से घायल व्यक्ति को स्थिति के अनुरूप 4000 से दो लाख तक का मुआवजा का प्रावधान है।
वज्रपात से कच्चा या पक्का घर पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त होने पर 95000 मुआवजा
दुधारू गाय भैंस की मौत पर प्रति पशु पच्चीस से तीस हजार तक मुआवजा का प्रावधान है।