जिलास्तरीय कार्यशाला के दौरान उप विकास आयुक्त ने बच्चियों के बीच प्रशस्ति पत्र का किया वितरण....
उपायुक्त सह जिला दण्डाधिकारी मंजूनाथ भजंत्री के निर्देशानुसार बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम पर जागरूकता कार्यक्रम सह प्रशिक्षण तथा पोषण पखवाड़ा को लेकर कार्यशाला का आयोजन शिल्पग्राम ऑडिटोरियम में उप विकास आयुक्त डॉ कुमार ताराचन्द की अध्यक्षता में की गयी। इस दौरान अतिथियों का स्वागत आंगनबाड़ी के बच्चियों द्वारा पौधा सौंपकर किया गया। आगे उपस्थित अतिथियों द्वारा सामुहिक रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इसके अलावे जिला स्तरीय कार्यशाला की शुरूआत में कस्तुरबा व तेजस्वीनी की बच्चियों ने बाल विवाह कुप्रथा व इससे होने वाले दुष्परिणामों को नुक्कड़-नाटक के माध्यम से प्रस्तुत किया। आगे कार्यक्रम के दौरान उप विकास आयुक्त डॉ0 कुमार ताराचन्द सभी को संबोधित करते हुए कहा कि समाज में कन्या भ्रूण हत्या, दहेज प्रथा, बाल विवाह, बेटियों को शिक्षा से वंचित रखना जैसी कुरीतियों के अलावा महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रुप से सशक्त बनाने के लिए समाज के अंतिम व्यक्ति को अपनी सोच व नजरिया बदलने की आवश्यकता है। सरकार के साथ-साथ समाज मे रहने वाले हर व्यक्ति व सामाजिक संस्थाओं का यह दायित्व बनता है कि वह जिले में दहेज कूप्रथा व बाल विवाह केवल नारेबाजी तक सीमित न रखकर समाज को जागरूक बनाने के लिए अपने स्तर से सभी ठोस प्रयास करे। आज हम सब ये प्रण लें कि अपने घर और आसपास बाल विवाह जैसी कुप्रथा को होने न दें। ये हम सभी को समझना होगा कि आजकल बेटी-बेटा एक समान होते हैं और आज के युग में लड़किया लड़कों से कहीं बेहतर अपने आप को साबित करने में कामयाब रहीं हैं। समाज से इस कुप्रथा को पूर्ण रूप से खत्म करने में सभी को आगे आना होगा तभी एक स्वस्थ समाज का निर्माण संभव हो पायेगा। वर्तमान में सबसे महत्वपूर्ण है कि बेटियों को शिक्षित करते हुए महिलाओं को उनका हक और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सभी मिलकर कर कार्य करें। वहीं दूसरी दहेज कूप्रथा को समाज से खत्म करने के उदेश्य से सबसे महत्वपूर्ण है कि बेटियों का शिक्षित, सशक्त व आत्मनिर्भर बनाएं।