बाल-विवाह एक संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध : विकास चंद्र  

2 वर्ष तक का कठोर कारावास एवं 1 लाख तक का जुर्माने का है प्रावधान

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गोड्डा। जिला बाल संरक्षण इकाई गोड्डा के संरक्षण अधिकारी विकास चंद्र द्वारा उत्क्रमित उच्च विद्यालय बंका (गोड्डा) में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संरक्षण अधिकारी विकास चंद्रा ने बाल-विवाह पर विस्तृत चर्चा करते हुए कहा कि बाल-विवाह एक संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है। किसी लड़की की शादी 18 वर्ष से पूर्व तथा किसी लड़के का 21 वर्ष से पूर्व करना बाल-विवाह की श्रेणी में आता है। बाल-विवाह को संपन्न कराने में जिनकी भी भूमिका है, वे सभी दोषी कहलाएँगे। दोषी को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत 2 वर्ष तक का कठोर कारावास एवं 1 लाख तक का जुर्माना का प्रावधान है। बाल-विवाह बच्चों से उनका बचपन छीन लेता है एवं अरमानों को कुचल देता है। बचपन हंसने-खेलने एवं पढ़-लिख कर उज्जवल भविष्य बनाने के लिए होता है। बाल-विवाह एक अभिशाप है।विद्यालय की छात्रा रेशमा खातून ने भी अपने विचार प्रकट करते हुए सभी से बाल-विवाह का तिरस्कार करने कहा और बेटियों को बाल-विवाह की बलिबेदी पर चढाने की बजाय “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” का नारा लगाया। कहा कि बेटे के जन्म पर मां बाप अत्यधिक प्रसन्नता से ओत प्रोत हो जाते हैं और बेटी के जन्म पर अफसोस करते हैं। ऐसी सोच को हमारे समाज में बदलने की जरूरत है। कार्यक्रम में बाल संरक्षण से संबंधित अन्य मुद्दों यथा- बाल तस्करी, बाल शोषण, बाल श्रम, बाल दुर्व्यवहार आदि पर बारीकी से चर्चा करते हुए बच्चों को जागरूक किया गया। मौके पर संरक्षण अधिकारी विकास चंद्रा, विधालय के प्रधानाध्यापक मो0 नजर इकबाल, हरिशंकर प्रसाद, प्रिया कुमारी एवं अन्य उपस्थित हुए।
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