पुलिस और समुदाय की जागरूकता से बाल संरक्षण और सुरक्षा संभव: डीआइजी

दुमका। बच्चों के शिक्षा को के लिए सरकार भी प्रयासरत है यदि लोग शिक्षित होंगे जागरूक होंगे तो बाल तस्करी, बाल श्रम, यौन शोषण के शिकार जैसे समस्या से बचे रहेंगे, उक्त बातें संथाल परगना प्रमंडल के पुलिस उपमहानिरीक्षक सुदर्शन प्रसाद मंडल ने ओक फाउंडेशन, एफ एक्स बी इंडिया सुरक्षा, साथी, प्रवाह एवं झारखंड विकास परिषद के संयुक्त तत्वाधान में स्थानीय होटल सुविधा रेसीडेंसी के सभागार में आयोजित बाल संरक्षण और सुरक्षा शोध प्रसार का प्रमंडलीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा। उन्होंने कहा कि इसके लिए अभियान के तौर पर कार्य करने की आवश्यकता है ओक फाउंडेशन, एफ एक्स बी, साथी, प्रवाह एवं झारखंड विकास परिषद जो कार्यशाला का आयोजन किया है यह सराहनीय पहल है लेकिन इन्होंने कहा कि ऐसा आयोजन या प्रशिक्षण पुलिस के साथ भी करने की जरूरत है क्योंकि कही न कही मामला पुलिस के हस्तक्षेप से ही समाप्त होता है इसलिए पुलिस और समुदाय को जागरूक होना आवश्यक है। इन्होंने कहा कि यदि कोई बच्चा होटल, ढाबा, गैरेज आदि में काम करता है तो यह भी तस्करी के दायरे में ही आता है। इन्होंने अभी के समय मे बाल यौन शोषण या बाल असुरक्षा के मुद्दे पर पुलिस संवेदन होकर काम कर रही है जिसके परिणाम स्वरूप काफी मामलों का त्वरित निष्पादन हुआ है करवाई भी हुई है। जिला परिषद अध्यक्ष जायस बेसरा ने कहा कि संथाल परगना में खास कर बच्चों के काफी समस्या है और सुदूरवर्ती क्षेत्र में बाल मजदूरी, पलायन जैसे समस्या व्यापक पैमाने पर है। इन्होंने कहा कि गांव स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम करने की आवश्यकता है ओर इन्होंने कहा कि संस्था बाल संरक्षण के मुद्दे पर जो कार्य करेगी और जहाँ हम जनप्रतिनिधियों को सहयोग की आवश्यकता होगी हर संभव सहयोग करेंगे। एफ एक्स बी इंडिया सुरक्षा के मुख्य कार्यकारी पदाधिकारी ममता बोरगोयारी ने विषय प्रवेश करते हुए कहा कि संथाल परगना में बाल संरक्षण के मुद्दे बड़ी गंभीर है जिसको लेकर एक अध्ययन हुआ है जिसमे विभिन्न हितग्राही का भागीदारी रहीं है। इन्होंने कहा कि यह यह रिसर्च समुदाय की सहभागिता से हुआ है क्योंकि कही न कही इसे समुदाय को मालिकाना हक लेकर मुद्दे को समाप्त करने में अग्रसर होना होगा। जिला परिषद उपाध्यक्ष सुधीर मंडल ने कहा कि बाल सुरक्षा के लिए ग्राम स्तर पर ग्राम बाल संरक्षण समिति को जागरूक करना होगा और अभियान के मोड पर कार्य करना होगा। बाल कल्याण समिति सदस्य गोड्डा के डॉ0 नीरज कुमार ने कहा कि यह अध्ययन गोड्डा के बोआरीजोर, दुमका के शिकारीपाड़ा, और पाकुड़ के अमड़ापाड़ा में एक लंबी प्रक्रिया को चलाकर अध्ययन किया गया है इसी के आधार पर इस क्षेत्र में आने वाले समय मे एक योजनाबद्ध तरीके से काम करने की जरूरत है जिससे कि समाज मे बाल सुरक्षा सुनिश्ति हो सके। जिला समाज कल्याण पदाधिकारी अनिता कुजूर ने कहा कि बाल तस्करी या बाल मजदूरी का मुख्य कारण समाज मे गरीबी का होना है इसलिए हमें यदि बाल मजदूरी जैसे समस्या का समाधान करना है तो अभिभावक के साथ काम करने की जरूरत है। दूसरे सत्र में गोड्डा, पाकुड़, एवं दुमका के बाल कल्याण समिति के सदस्य, जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी, चाइल्ड लाइन के पदाधिकारी ने अपने अपने विचार रखा। जबकि तीसरे सत्र में समुदाय के प्रतिनिधियों ने अपने विचार प्रकट किया। कार्यक्रम में परंजिता, डॉ0 चेतना, दिलीप कुमार दुबे, मनोरंजन , प्रेम, अमर कुमार ठाकुर, सेवेस्टिन सहित दर्जनों ने भाग लिया।कार्यक्रम का संचालन कालेश्वर मंडल ने जब कि धन्यवाद ज्ञापन सुबसिनी सोरेन ने किया।

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