दशरथ महतो/दुमका। सांस्कृतिक नगरी बाबा बासुकीनाथ धाम में परंपरा के अनुसार बाबा भोलेनाथ का वैवाहिक कार्यक्रम गुरूवार से शुरू हो गया है। मिथिलाचल से आये श्रद्धालुओं ने बाबा बासुकीनाथ धाम में बाबा भोलेनाथ के तिलक की रिवाज को पूरा किया। बसंत पंचमी के अवसर पर दुमका के बासुकिनाथ धाम में मिथिलांचल के श्रद्धालु आते है और तिलक की रस्म को पूरा करते है जो तिलक उत्सव कहलाता है।
गुरूवार को बासुकीनाथ मंदिर प्रांगण में हजारों की संख्या में मिथिला से आए श्रद्धालुओं ने परंपरा के अनुसार बाबा का तिलक उत्सव को पूरा किया। मिथिलांचल श्रद्धालु का कहना है कि मां पार्वती का मायका मिथिलांचल में है और बाबा भोलेनाथ उनके दामाद है। इसलिए प्रत्येक वर्ष मिथिला से हजारों श्रद्धालु बाबा बासुकीनाथ आते है और परंपरा के अनुसार तिलक करते है।
बाबा भोलेनाथ के तिलक उत्सव के साथ ही रंगों के त्योहार होली की शुरुआत हो गई। तिलक करने के बाद परंपरागत तरीके से बाबा बासुकीनाथ धाम में मिथिलाचल और बाबा बासुकीनाथ धाम के श्रद्धालुओं ने एक दूसरे को रंग गुलाल लगाकर होली के त्योहार की शुरूआत की। मान्यता है बाबा भोले के विवाह के बाद ही हिन्दू धर्म में विवाह किया जाता है वही तिलकत्सव के साथ ही बाबा भोलेनाथ के विवाह यानि शिवरात्रि की तैयारी भी शुरू हो गया है।