सरौन काली मंदिर में भक्तों की मन्नतें होतीं है पूरी

चकाई I बिहार-झारखंड के सीमा पर स्थित सरौन काली मंदिर की वार्षिक पूजा 06 जून को होगी पूजा की तिथि की घोषणा होते ही लोगों की भीड़ पूजा-अर्चना को लेकर उमड़ रही है। मां काली के प्रति लोगों का असीम विश्वास और भक्ति देखते ही बनता है सरौन स्थित अजय नदी और बड़का आहर के किनारे पर बसे इस मंदिर के निर्माण के बारे में ठीक ठीक कोई नहीं बता सकता फिर भी कथा है कि यह मंदिर का निर्माण 500 से 700 वर्ष पहले ग्राम गादी के प्रहलाद सिंह के वंशजों ने कराया था।मंदिर के पुजारी दशरथ पांडेय ने बताया कि उस वक्त इस जमीन पर घना जंगल हुआ करता था अचानक एक दिन वहां के वाशिंदे को एक बिस्फोट की आवाज सुनाई पड़ी जो उस भूखंड से हुई थी आवाज सुनकर गांव के सैकड़ों लोग इक्ट्ठा हुए और जिस भूखंड के पास आवाज सुनाई दी वहां पर लोग जब पहुंचे तो देखा कि वहां पर जमीन फटकर सिंदुर से लिपटा मिट्टी का एक चार-पांच फीट का पिंडी निकला हुआ है इसे देख लोगों ने मंदिर का निर्माण करवाया और विधि पूर्वक पूजा अर्चना कर सिंदुर से बने पींडी को मंदिर में स्थापित किया गया तब से लोग इस मंदिर में पूजा अर्चना किया करते है ऐसी मान्यता है कि मंदिर पहुंचकर जो भक्तजन सच्चे मन से जो कुछ भी मां काली के सामने मन्नते मांगते हैं मां उनकी हर मनोकामना को हर हाल में पूरा करती है इस मंदिर में प्रत्येक वर्ष आषाढ़ माह में वार्षिक पूजनोत्सव किया जाता है

The short URL of the present article is: https://bharatbulletin.in/5amf

Leave a Comment

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *