
संताल परगना महाविद्यालय का स्थापना 2 सितंबर 1954 को बाबा लाल हेम्ब्रम के नेतृत्व में स्थानीय लोगों के योगदान से किया गया था। बाबा लाल हेम्ब्रम द्वारा तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू से संताल परगना जैसे पिछड़े इलाके के छात्र/छात्राओं के लिए शिक्षा के प्रसार हेतु एक बड़े विद्यालय की मांग की गयी थी जिस पर पंडित नेहरू द्वारा सहमती देते हुए इस महाविद्यालय की स्थापना की गयी थी। महाविद्यालय ने 69 वां स्थापना दिवस मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर (डॉ) सोना झरिया मिंज ने महाविद्यालय के संस्थापक बाबा लाल हेंब्रम के प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया गया। मौके पर महाविद्यालय के तमाम विभागों के विभागाध्यक्ष तथा छात्र/छात्राएं उपस्थित थे। कुलपति को महाविद्यालय प्राचार्य डॉ खिरोधर प्रसाद यादव द्वारा पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया गया। महाविद्यालय का 69वां स्थापना दिवस को यादगार बनाते हुए रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। महाविद्यालय के छात्र छात्राओं ने स्वागत गीत और सामूहिक नृत्य कर कार्यक्रम को मनमोहक बना दिया। कुलपति ने कहा कि इस प्रांगण में आना उनके लिए बहुत ही खुशनुमा पल होता है। छात्र/छात्राओं को शिक्षा के महत्व तथा महाविद्यालय के योगदान को विस्तार से बताया। कार्यक्रम की शुरुआत राजनीतिशास्त्र विभाग के डॉ शम्भू कुमार सिंह के स्वागत वचनों से किया गया तत्पश्चात इतिहास विभाग की डॉ सुमित्रा हेम्ब्रम द्वारा संताल परगना महाविद्यालय के इतिहास से अवगत कराया गया। महाविद्यालय के प्राचार्य ने संस्थापकों, पूर्व प्राचार्यों, शिक्षकों, कर्मचारियों, छात्र-छात्राओं एवं स्थानीय लोगों के योगदान को याद किया, जिनकी बदौलत कॉलेज ने यह मुकाम हासिल किया। यह महाविद्यालय सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय का प्राइम महाविद्यालय है। कार्यक्रम को सफल बनाने में महाविद्यालय के सभी शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभाग के डॉ यदुवंश यादव द्वारा किया गया।
