वनाश्रित आदिवासियों और गरीबों को जमीन का पर्चा दे सरकार : राजेश यादव

महाधिवेशन तैयारी क्रम में छोटकी कुम्हरिया में माले की बैठक संपन्न, बनाई गई कमिटी

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बेंगाबाद। बड़ी तादाद में वनाश्रित आदिवासियों और गरीबों को आज तक वन भूमि का पर्चा नहीं मिला है। ऐसे तमाम आदिवासियों और गरीबों को वन विभाग द्वारा परेशान करने किए जाने के बजाय उन्हें वन भूमि का पर्चा दिया जाय।उक्त बातें भाकपा माले नेता सह अखिल भारतीय किसान महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश यादव ने मंगलवार को बेंगाबाद प्रखंड के छोटकी कुम्हरिया में आयोजित स्थानीय लोगों की एक मीटिंग को संबोधित करते हुए कही। मीटिंग में मौजूद लोगों ने कहा कि, वे सदियों से इस इलाके में रहते आए हैं और वन भूमि पर आश्रित हैं। वे चाहते हैं कि, जिस जमीन पर रहते और खेती-बारी करते हैं, उस जमीन का पर्चा उन्हें मिले, लेकिन आज तक हमारी यह समस्या हल नहीं हुई है।लोगों की बातों को सुनने के बाद श्री यादव ने कहा कि, जंगल क्षेत्र में रहने वाले आदिवासियों को आज मामूली झोपड़ी या पीएम आवास बनाने तक पर रोक लगाई जा रही है, उनके पेयजल की जरूरत के लिए पानी टंकी बनाने पर भी रोक लगाई जा रही है। लेकिन दूसरी तरफ केंद्र की मोदी सरकार की गलत नीतियों के कारण लाखों एकड़ जंगल की जमीन खुलेआम कंपनियों को मुहैया कराई जा रही है।माले नेता ने कहा कि, मौजूदा सरकार आदिवासी और गरीबों के बजाय कंपनियों के लिए ज्यादा फिक्रमंद है। इनका वोट लेने वाले प्रतिनिधि भी इनकी उपेक्षा करते हैं। हालत यह है कि, अगर वनाश्रित आदिवासी या अन्य गरीब एक झोपड़ी भी बनाते हैं, तो उसपर कार्रवाई के लिए पूरा महकमा खड़ा हो जाता है। लेकिन इसी देश में बड़े-बड़े जंगल कंपनियों के हवाले किए जा रहे हैं। सरकार की यह नीति गलत है। हम मांग करते हैं कि, वन भूमि में रहने या खेती-बारी करने वाले तमाम आदिवासियों और गरीबों को संबंधित जमीन का पर्चा दिया जाए। उन्होंने मौजूद लोगों से गांव-गांव में भाकपा माले का संगठन बनाने तथा अपने हक-अधिकार की लड़ाई तेज करने का आह्वान किया। साथ ही इसके लिए फरवरी महीने में भाकपा माले के 11वें महाधिवेशन को सफल बनाने की अपील की और ऐलान करते हुए कहा कि, पार्टी महाधिवेशन के बाद वन कर्मियों द्वारा गरीब गुरबों तथा आदिवासियों को तंग किए जाने के खिलाफ बेंगाबाद रेंज ऑफिस में बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने लोगों से भाकपा माले की कमिटी गठित करने और जन आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील भी की।मौके पर गठित भाकपा माले की ग्राम कमेटी में शामिल तथा मौजूद लोगों में मुख्य रूप से रामलाल मुर्मू, अशोक हांसदा, लखीराम किस्कू, रामलाल मरांडी, सोमरा हांसदा, रामलाल हंसदा, छोटा सुजन किस्कू, दशरथ हांसदा, छोटका मरांडी, बुधु हेंब्रम, जिशुलाल मरांडी, शंभू ठाकुर, नवल सिंह, छोटका मरांडी, सुकरा हांसदा, छोटकी देवी, धनी किस्कू, पानमुनी मुर्मू, सुनीता किस्कू, कोलोसी किस्कू, पानो हांसदा, बड़की देवी, सरिता बेसरा, आरती सोरेन, बड़की सोरेन समेत अन्य थे।
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