कृषि उपज विपणन विधेयक पर सरकार की सकारात्मक पहल, आन्दोलनरत व्यवसायियों ने राहत की सांस ली – संप चैम्बर

देवघर। कृषि विधेयक के विरोध में विगत एक महीने से व्यापारियों द्वारा किया जा रहा विरोध तथा 15 फरवरी से अनिश्चितकालीन खाद्य वस्तुओं का व्यापार बन्दी सरकार की सकारात्मक पहल के बाद रविवार से वापस ले ली गई। संप चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज देवघर के अध्यक्ष आलोक मल्लिक जो देवघर में इस राज्यव्यापी विरोध को व्यापारियों की ओर से नेतृत्व कर रहे थे, ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि सरकार से मिला सकारात्मक आश्वासन राहत देने वाला कदम है। उन्होंने बताया कि रांची में शनिवार की रात लिए गए उक्त निर्णय के आलोक में देवघर में भी रविवार से ही बन्दी स्थगित कर व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठान खोल लिया है। मुख्यमंत्री की पहल पर फेडरेशन ऑफ झारखण्ड चैम्बर के साथ कृषि मंत्री और मुख्यमंत्री के सचिव श्री विनय चौबे के सम्मानजनक तरीके से हुई वार्ता के आलोक में फेडरेशन अध्यक्ष श्री किशोर मंत्री ने अनिश्चितकालीन बन्दी को स्थगित रखने का निर्णय लिया गया। उक्त विवादास्पद बिल की वापसी और खाद्यान्नों पर जीरो टैक्स की मांग व्यापारियों की ओर से अब भी बनी हुई है। खाद्यान्न व्यापार और जनता को हो रही कठिनाइयों को नहीं खींचते हुए तत्काल सरकार के आश्वासन का सम्मान किया गया है। सरकार ने चैम्बर के लोगों से सभी बिन्दुओं पर चैम्बर प्रतिनिधि के साथ चर्चा कर ही कोई फैसला लेने का आश्वासन दिया है। 
संप चैम्बर के अध्यक्ष श्री मल्लिक ने देवघर में इस जनविरोधी आन्दोलन को धारदार बनाए रखने में और चल रहे अनिश्चितकालीन बन्दी को सफल रखने में व्यवसायियों से मिले अभूतपूर्व साथ के लिए सभी को साधुवाद देते हुए आभार प्रकट किया है। संप चैम्बर के साथ ही देवघर चैम्बर, बैद्यनाथधाम चैम्बर, खुदरा दुकानदार संघ, राइस मिल एसोसिएशन, फेडरेशन, थोक खाद्यान्न व्यवसायियों और पशु आहार व्यवसायियों के सभी पदाधिकारियों और सदस्यों के बेमिसाल एकता प्रदर्शन से व्यापारियों की लड़ाई संगठित रूप से लड़ने को बल मिला है। हमने संगठन की शक्ति से सरकार को हमारी बात सुनने के लिए बाध्य किया। आगे भी इसी तरह से हम शासन और प्रशासन के समक्ष सुगम व्यापार और अपनी समस्याओं के लिए लड़ने में कोई कसर नहीं रखेंगे और बढ़कर मिलकर नेतृत्व करेंगे। जहां तक जनता और व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ाने वाली कृषि उपज विपणन बिल की बात है, सरकार यदि आश्वासन के अनुरूप व्यापारियों के हित में सकारात्मक निर्णय से हटेगी तो फिर से और भी कठोर एवं संयमित रूप से आन्दोलन को तेज किया जाएगा। व्यापारी फिर से उसी उत्साह के साथ संगठित होंगे।
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