रांची। विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अनुपूरक बजट पर चर्चा के बाद कहा कि सरकार का प्रयास था कि राज्य के मूलवासियों व आदिवासियों के लिए नियोजन नीति बनाई जाए। ऐसा इसलिए किया गया था क्योंकि इसके पहले जो राज्य में नौकरी लेकर आए थे, वे न तो यहां की संस्कृति और न ही यहां की भाषा से परिचित थे। वे यहां क्या कर रहे होंगे, यह समझा जा सकता है। सरकार इस राज्य के सवा तीन करोड़ लोगों के प्रति प्रतिबद्ध है।
झारखंड उच्च न्यायालय से नियोजन नीति रद्द होने के बाद से ही नौजवान धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार इस पर गंभीरता से विचार कर रही है। हमारा प्रयास है कि विधिसम्मत और संवैधानिक रूप से राज्य के बच्चों और नौजवानों के हक में निर्णय लिया जाए। इसे लेकर सरकार आगे बढ़ रही है। राज्य के नौजवान जो चाहेंगे, वही होगा।
मुख्यमंत्री के संबोधन से पहले विपक्ष ने किया वाकआउट
मुख्यमंत्री का संबोधन आरंभ होने के पहले ही विपक्षी सदस्य सदन से बाहर चले गए। इससे पहले विधानसभा में चर्चा के बाद वित्तीय वर्ष 2022-23 के 8533 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पारित हो गया। सदन में अनुपूरक बजट के कटौती प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान नियोजन नीति और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर विपक्ष ने सरकार को घेरने की कोशिश की। यह भी कहा कि कहां साल में पांच लाख युवाओं को नौकरी देने का वादा था और दी सिर्फ 357 नौकरियां।
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