दिल्ली पुलिस द्वारा धरना स्थल पर किए जा रहे ज़्यादतियों पर लगे रोक-अफजल
बेरमो / जंतर मंतर पर यौन हिंसा व मानसिक शोषण के खिलाफ देश की जानी मानी महिला पहलवान अपने और साथी खिलाड़ियों के साथ बरसों से कुश्ती संघ के अध्यक्ष भाजपा नेता बृज भूषण शरण सिंह द्वारा किए जा रहे यौन शोषण के विरुद्ध कार्यवाई के लिए आंदोलन कर रहे हैं। पहलवानों के दबाव के बाद भारत सरकार के खेल विभाग व IOA द्वारा समिति तो बनायी गयी लेकिन समिति लीपा पोती में लग गयी। सर्वोच्च न्यायालय के दख़ल और लगातार संघर्ष के बाद बृज भूषण शरण सिंह पर FIR तो हुई लेकिन आगे की कोई कार्यवाई होने की सम्भावना नहीं दीखती उपरोक्त बातें यूनाइटेड मिल्ली फोरम के प्रदेश जेनरल सेक्रेट्री अफजल अनीस ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर मिडिया को कही। उन्होंने यह भी कहा कि सोचने की बात है कि एक ओर प्रधान मंत्री, गृह मंत्री व महिला विकास मंत्री इस पूरे मसले पर चुप्पी साधे हुए हैं। वहीँ दूसरी ओर बृज भूषण शरण सिंह पहलवानों के ऊपर तथ्यहीन व भद्दी टिपण्णी किए जा रहा है और यह स्पष्ट कहा है कि अगर प्रधान मंत्री या गृह मंत्री उसे इस्तीफा देने के लिए कहे, तो वो तुरंत दे देगा. इससे केंद्र सरकार की मंशा स्पष्ट है।पिछले कुछ सालों के अनुभव बताते हैं की यदि आरोपी सत्ताधारी दल के क़द्दावर और बाहुबली सदस्य नेता, पूँजीपति हैं तो बड़े से बड़े आरोपों की सही जाँच ही नहीं होती, न्याय तो दूर की बात है. यहाँ तक कि जिन अपराधियों को पिछले सरकारों के समय हत्या, बलात्कार जैसे मामलों में सजा हुई थी उन्हें भी परोल पर और पूरी सजा माफ़ी के साथ छोड़ा जा रहा है। राजनीति और सत्ता पर पैसा और माफिया पूरी तरह क़ाबिज़ हो चुके हैं।3 मई की रात इन अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के साथ दिल्ली पुलिस ने महिला पुलिस की अनुपस्थिति में और शराब के नशे में जिस प्रकार की हिंसा और दुर्व्यवहार किया उसने सत्ता के घिनौने चेहरे के पहले के सभी रेकर्ड तोड़ दिए। महिला पहलवानों के लिए लगातार हो रही बारिश के मद्देनजर लाई गई चारपाइयों को धरना स्थल पर ले जाने से बलपूर्वक रोका गया और महिला पहलवानों के बाल खींचकर उनके साथ हाथापाई, गालीगलोज और बदसलूकी की गई। इस घटना में एक पहलवान के सिर में गंभीर चोट भी आई है। घटना ने मोदी सरकार के “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” नारे के खोकलेपन को उजागर कर दिया है।यूनाइटेड मिल्ली फोरम,झारखंड यह माँग करती है कि पोसको क़ानून के तहत मुक़दमे में ब्रज भूषण सिंह (जिसके ऊपर पहले से भी 40 से अधिक आपराधिक मुक़दमे हैं) को अविलम्ब गिरफ़्तार किया जाय, उसे कुश्ती संघ से निष्कासित किया जाय, जंतर मंतर पर पहलवानों पर हुए हमले के दोषी पुलिस कर्मियों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाई हो और सभी खेलों से राजनीतिज्ञों, बाहुबलियों और उनके ऐजेंटों को निकाल कर खेल से जुड़े प्रतिष्ठित व्यक्तियों को ज़िम्मेवारी सौंपी जाय. तभी देश खेल में आगे बढ़ पाएगा और खिलाड़ी सुरक्षित रह पाएँगे।