बोकारो I आरएमएचपी स्टेकर के लिए एंटी कोलिशन डिटेक्शन सिस्टम का उद्घाटन बीएसएल के प्रमुख (हेड) और अधिशासी निदेशक (संकार्य) बी के तिवारी ने किया.
मटेरियल बेड बनाने के लिए आरएमएचपी में स्टेकर मशीनों का उपयोग किया जाता है, लेकिन असमान मटेरियल डंपिंग के कारण बेड की ऊपरी परत असमान हो जाती है जिसके कारण कच्चे माल के ढेर से टकराने से बचने के लिए स्टेकर के बूम को सावधानी से चलाने की आवश्यकता होती है. कभी-कभी अनजाने में बूम एडजस्टमेंट की विफलता के कारण, स्टैकर संरचना कच्चे माल के ढेर से टकरा जाती है जिससे स्टैकर बूम टूट जाता है और क्षतिग्रस्त हो जाता है.
गतिमान संयंत्र की वस्तुओं, जैसे स्टैकर और सामग्री के ढेर के बीच कोलिशन (टक्कर) का अनुमान लगाना और रोकना कठिन कार्य है. सहवर्ती कोलिशन से उपकरणों को नुकसान के साथ ही उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है. कोलिशन का पता लगाने के पारंपरिक तरीके या तो लिनियर ट्रांसड्यूसर या इन्फ्रारेड/रडार दूरी पहचान प्रणाली पर आधारित होते हैं. लिनियर ट्रांसड्यूसर के ‘स्लिप‘ होने की संभावना बनी रहती है और इन प्रणालियों का मेंटेनेंस भी अधिक है. उचित संचालन के लिए इन्फ्रारेड/रडार सिस्टम को हर समय बेदाग साफ रखा जाना ज़रूरी होता है जो सिंटर, डोलोमाइट, लौह अयस्क, आदि जैसे महीन चूर्ण सामग्री के साथ यार्डों में सुनिश्चित करना बहुत कठिन है.
ईएल एंड टीसी और आरएमएचपी विभागों की टीम ने बूम और कच्चे माल के ढेर के बीच कोलिशन को रोकने की चुनौती ली. टीम ने लेज़र तकनीक पर आधारित टकराव रोधी प्रणाली को इन-हाउस डिज़ाइन किया और इसे स्टेकर #4 पर स्थापित किया.
शरद गुप्ता,सीजीएम (मेंटेनेंस), धनंजय कुमार, सीजीएम (आरएमएचपी), बिपिन कृष्ण सरतापे (सीजीएम-सी, ए एंड कम्युनिकेशन), वी के सिंह, सीजीएम (मैकेनिकल), और एस गंगोपाध्याय, जीएम (ईएल एंड टीसी), जॉयदीप दासगुप्ता, महाप्रबंधक (आरएमएचपी) और ईएल एंड टीसी और आरएमएचपी विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित थे.
कार्यक्रम के अंत में सिस्टम का सफल लाइव प्रदर्शन दिखाया गया. बी के तिवारी ने इस सिस्टम के इन-हाउस डिज़ाइन के लिए टीम को बधाई दी. यह लेजर तकनीक पर आधारित पहला एंटी कोलिशन डिटेक्शन सिस्टम है जिसे सेल-बोकारो स्टील प्लांट में लागू किया गया है.