विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा खोरठा भाषा का समुचित विकास समय की मांग

खोरठा दिवस धूमधाम से मनाया गया

देवघर। खोरठा भाषा सृजन मंच झारखंड देवघर के तत्वाधान में खोरठा दिवस समारोह स्थानीय कुशवाहा भवन में धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम दो सत्रों में चला जिसमें शहर के जाने-माने साहित्यकारों कवियों गीतकार एवं बुद्धिजीवियों ने अपनी भावपूर्ण रचना सुनाकर देर शाम तक समां बांधे रखा. इस अवसर पर दो सत्रों में कार्यक्रम हुआ।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए रिटायर्ड हेडमास्टर कैलाश कापरी ने कहा कि खोरठा भाषा का समुचित विकास सभी लोगों के सामूहिक प्रयास से ही संभव है।खोरठा भाषा में जो चीजें लोक में सदियों से चली आ रही है, उसे सहेजने की जरूरत है। मुख्य अतिथि के तौर पर जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष बालेश्वर प्रसाद सिंह थे,जिन्होंने कहा कि खोरठा भाषा में जो आत्मीयता का दीदार होता है, वह बाहरी भाषाओं में नहीं दिखता है। खोरठा भाषा सृजन मंच के संस्थापक अध्यक्ष फाल्गुनी मरीक कुशवाहा ने कहा कि बहुत ही समृद्ध भाषा है इससे बोलने और लिखने में कभी किसी को शर्मिंदगी महसूस नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि खोरठा बोलने में कहीं भी लोगों को शर्मिंदगी महसूस नहीं करनी चाहिए। प्रो रामनंदन सिंह ने कहा कि खोरठा भाषा को और अधिक समृद्ध करने की जरूरत है. तिलक सेवा समिति के केंद्रीय अध्यक्ष हरे कृष्ण राय में कहा कि खोरठा भाषा की पढ़ाई एसके यूनिवर्सिटी में भी होनी चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता त्रिवेणी वर्मा ने कहा कि खोरठा हम लोगों की मूल भाषा है जिससे देवघर के दर्जनों रचनाकार लिपिबद्ध कर रहे हैं, जो साधुवाद के पात्र हैं। गोष्ठी के दूसरे सत्र में भव्य कवि सम्मेलन हुआ जिसमें कवियों है बारी बारी से अपनी कविता पाठ कर खूब तालियां बटोरी जलेश्वर ठाकुर शौकीन ने-हमरो मरद छै दारुबाज है सजनी.. सुनाई जबकि विपुल कुमार मिश्र ने खोरठा भाषा की लोकोक्तियां को बहुत ही बारीकी से उद्धरण देते हुए कविता सुनाई। नरेश साह ने हिंदी में कविता सुनाई जबकि विनाय कृष्ण शर्मा ने काली मां पर आधारित गीत खोरठा भाषा में सुना कर सबों को अपनी और आकर्षित किया। प्रकाश चंद्र झा खोरठा में कविता पाठ की जबकि अर्जुन श्रीवास्तव ने एक बेटी के पिता का क्या दर्द होता है, इस पर आधारित कविता सुनाई। वीरेश वर्मा ने खोरठा में-कि रकम चलतो संसार, महीना में मिले छो पांच किलो चार… सुनाया और सरकारी व्यवस्था पर कटाक्ष किया। सारवान से आए पंचम वर्मा ने मनरेगा पर आधारित बहुत ही मार्मिक कविता खोरठा भाषा में सुनाई। इन कवियों के अलावा अशोक पांडेय, माया केसरी, बुद्धन बौद्ध, मन्नू प्रसाद चौधरी, राकेश कुमार, राजेश मंडल, राजेंद्र प्रसाद मरीक, पुरुषोत्तम प्रशांत आदि ने कविता पाठ कर गोष्ठी को रोचक बनाया। मंच संचालन सत्य नारायण पांडेय ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन कैलाश कापरी ने किया। गोष्ठी में शामिल हुए कवियों को मंच की ओर से सम्मानित किया गया।
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