मामला प्राथमिक विद्यालय धोबोना का
बच्चों को झारखंड के मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री का नाम तक नहीं पता
अर्धवार्षिक परीक्षा में नही आए शत प्रतिशत बच्चे
जामताड़ा। जामताड़ा के फतेहपुर प्रखंड का प्राथमिक विद्यालय धोबोना एक ऐसा स्कूल है जहां शत प्रतिशत बच्चे अर्धवार्षिक परीक्षा में भी नहीं पहुंचते हैं। इतना ही नहीं इस स्कूल में बच्चों को अल्पाहार तक नहीं मिलता। वही यहां के कुछ बच्चे तो शिक्षकों का नाम भी नहीं जानते । कई बच्चे देश के राष्ट्रपति, झारखंड के सीएम और शिक्षा मंत्री तक का नाम नहीं बता पाए। ऐसे में इस विद्यालय के शिक्षक बच्चों को किस कदर शिक्षा देते होंगे यह सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। प्राथमिक विद्यालय धोबोना डुमरिया पंचायत के अंतर्गत आता हैं। जहां शिक्षक तो दो है लेकिन नामांकित बच्चों की संख्या महज 25 है। जब हमारे संवाददाता ने विद्यालय का जायजा लिया तो वहां महज चंद बच्चे ही मौजूद थे और गेट में झूल रहे थे। कई बच्चे स्कूल ड्रेस में भी नहीं थे। जब पांचवी कक्षा की छात्रा खुशी मुर्मू से देश के राष्ट्रपति, झारखंड के शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री का नाम पूछा गया तो वह नहीं बता पाई । वही चौथी क्लास के बच्चे सत्यनाथ सोरेन से जब विद्यालय के शिक्षकों का नाम भी पूछा गया वह नहीं पता पाए। वही एक बच्चे से जब विद्यालय का पूरा नाम पूछा गया तो वह भी नहीं बता पाया। एक दो बच्चों ने बताया कि उ आज तक अल्पाहार तक भी नहीं मिला है । जब इस संबंध में वहां शिक्षक शुभंकर मंडल से बच्चों के द्वारा राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री का नाम नहीं बता पाने के संबंध में पूछा गया तो वह पहले तो कन्नी काटते नजर आए वहीं उन्होंने कहा कि आदिवासी बच्चा है उतना नहीं आता है। बाद में कहने लगा की बड़े बच्चे से पूछिए। जब बताया गया कि बड़ा बच्चा ही था तो कहने लगा उस बच्चा का पिताजी भी शिक्षक है। वहीं अन्य सवालों से भी शिक्षक शुभंकर मंडल भागते नजर आए ।अल्पाहार नहीं देने के मामले पर भी उन्होंने कहा कि पंद्रह सौ रुपया में 3 महीना कैसे चलाएं। बहरहाल जो भी हो ऐसे में प्राथमिक विद्यालय धोबोना में पठन-पाठन से लेकर शिक्षकों की सोच क्या है यह साफ झलकता है ।जब अर्धवार्षिक परीक्षा में ही शत-प्रतिशत बच्चे उपस्थित नहीं हो तो ऐसे में इस विद्यालय के शिक्षकों की कार्यशैली महज खानापूर्ति को साबित करती है। जो जांच का भी विषय बनता है ।
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