दुमका I मशहूर संताली लेखक, समाजिक संगठनआईसवाक्स के मंझी हाड़ाम व संताली पत्रिका “जिवेत् आड़ाङ” के मुख्य संपादक अलाकजँड़ीं मुर्मू ने आदिवासी- मूल वासी विकास मोर्चा की केन्द्रीय कमिटी के साथ दिन मंगलवार को शिकारीपाड़ा में सामाजिक हित-अहित के मामले पर प्रमुखता के साथ विचार-विमर्श किया। अलाकजँड़ी मुर्मू ने संताल परगना की समृद्ध भाषा संताली तथा संताली भाषा-साहित्य व संस्कृति के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्यों, समाजिक सौहार्द, एसपीटीएक्ट के तहत प्रदत रैयती जमीन मालिकों के हक-अधिकार व पारंपरिक माँझी-परगना जैसी स्वशासन व्यवस्था पर लगातार बाहरी अतिक्रमण तथा ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर स्थानीय प्रशासन की अनदेखी पर अपने विचार रखा। उनके विचारों को गंभीरता से लेते हुए आदिवासी-मूलवासी विकास मोर्चा की केन्द्रीय कमिटी ने चिंतन-मनन का भरोसा दिलाया। इस विमर्श में जो बातें सामने आयीं उसमें उसमें पूरे प्रदेश सहित संताल परगना व संताल समाज में आदिवासी सेंगेल अभियान, ऑलचिकी हुल बैसी, सेंगेल माँझी, सेंगेल परगाना जैसे असामाजिक संगठनों द्वारा सुनियोजित तरीके से संताल समाज को बांटने का काम किया जा रहा। हासा-भाषा, धर्म कोड व ऑलचिकी लिपि के मुद्दे की आड़ में कार्यक्रम के बहाने आदिवासी समाज के अंदर फूट डालने की जीतोड़ कोशिशें की जा रही। यूट्यूब पर रोस्टिंग वीडियो बनाकर, फेसबुक पर खुलेआम साम्प्रदायिक विद्वेष, नफरत, हिंसा, अपलेख, अपशब्द गाली-गलौज के माध्यम से समाजिक सौहार्द और शांति भंग करने का दुस्साहस किया जा रहा। उपरोक्त साजिशों के विरुद्ध अभियान चलाकर आवाज बुलंद करने की जरूरत है ताकि ऐसे असामाजिक तत्वों से आदिवासी समुदाय को दूर रखा जा सके। यह भी बात सामने आयी कि ऐसे क्रियाकलापों से दंगा-फसाद, लड़ाई झगड़ा, केस-मुकदमों की संभावनाएं अत्यधिक बढ़ जाती है। बेरोजगारी, पलायन, शिक्षा, स्वास्थ्य, सरकारी विकास जैसे मुद्दों से ध्यान भटकाने और प्रक्षेत्र में अशांति का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है। आदिवासी मूलवासी विकास मोर्चा की केन्द्रीय कमिटी ने विधायिका, कार्यपालिका व न्यायपालिका सहित स्थानीय प्रशासन की शिथिलता पर चिंता जताई। झारखंड सरकार व स्थानीय प्रशासन से माँग की गई है कि सोशल मीडिया के प्लेटफार्म यथा- यूट्यूब, फेसबुक, इस्टाग्राम जैसे माध्यम से असंवैधानिक, असामाजिक, गैर-जिम्मेदाराना गतिविधियों को चिन्हित व नियंत्रित कर सबंधित व्यक्ति व संगठन के विरुद्ध कठोरतम कानुनी कार्रवाई की जाय। अलाकजँड़ी मुर्मू ने केन्द्रीय कमिटी को तोहफा स्वरूप “जिवेत् आड़ाङ ” संताली पत्रिका की एक-एक प्रति देकर संताल समाज की समृद्ध संताली भाषा की सुरक्षा के लिए आने वाली पीढ़ी के निमित्त संताली मातृभाषा को शिक्षा जगत से जोड़कर उसे आम आदमी के लिए उपयोगी बनाए। इस मौके पर मोर्चा के केन्द्रीय अध्यक्ष हाबिल मुर्मू, केन्द्रीय अल्पसंख्यक अध्यक्ष मंजर अंसारी, मानवेल हेम्ब्रम, डिग्नेस सोरेन, पंचायत अध्यक्ष पीरू सोरेन, सहित अन्य सदस्यगण उपस्थित थे।
संताली भाषा-साहित्य, संस्कृति व परंपरा के विरुद्धअसामाजिक तत्वों की साजिशों का पर्दाफाश जरूरी: अलाकजँड़ीं मुर्मू
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