झारखंड बंगाली संगठन ने आयोजित किया राज्य सम्मेलन

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मधुपुर। मातृभाषा बंगला के साथ झारखंड सरकार के अमानवीय व्यवहार के विरुद्ध झारखंड के कईं भाषा संगठनो ने रविवार को मधुपुर राज्य सम्मेलन मे उपस्थित हुए। जिसमे जमशेदपुर, साहिबगंज,दुमका राणीश्वर, ,जामताड़ा,करों,घमणी, के प्रतिनिधियो ने आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनाव के लिए रणनीति तैयार की। सभी भाषा सैनिकों ने एक सूर मे कहा झारखंड की धरती और संस्कृति मे बंगला भाषा और संस्कृति की अहम भूमिका रही है। झारखंड के गांव में आज भी सब कुछ बंगला संस्कृति के हिसाब से ही चलता आ रहा है। 
विश्वकवि  रवीन्द्रनाथ टैगोर जिनका लगाव झारखंड के मधुपुर गिरिडीह से रहा है।पंडित ईश्वरचंद्र विद्यासागर जिन्होंने लगभग अठारह वर्ष कड़माटाॅड़ मे रहकर गरीवो का सेवा किया।सर जगदीश चंद्र बोस जिनका पेड़पौधों से शोध का मुख्य केंद्र गिरिडीह रहा है।रवीन्द्रनाथ तथा उनके भाई ज्योतीन्द्रनाथ टैगोर जिन्होंने रांची टैगोर हिल को अपना चिन्तन शिविर बनाया था तथा वर्षो उस जगह पर अपना ध्यान और चिंतन तथा लेखनी का काम किया। आज यह सभी जगह को देखने के लिए दुर दुर से लोग आते है।यह सभी  झारखंड विरासत से वंचित है। 
हमे यह भूलना नहीं चाहिए कि देश की आजादी मे सबसे ज्यादा इसी भाषा के लोगो ने कुर्बानी दी है।स्वामी विवेकानन्द की बात हम करते है,नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की बात हम करते है,ॠषी अरबिंदो की बात हम करते है यह सभी की मातृभाषा बंगला था।बंदे मातरम् के रचयिता श्री बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय की मातृभाषा बंगला था। नोबेल शांति पुरस्कार सबसे ज्यादा इसी भाषा के लोगो को प्राप्त है।बावजूद इसके आज मुलभुत समस्या से भी हमे वंचित होना पड़ रहा है। आज हमे शिक्षा से रोजगार से कोषों दुर खड़ा कर दिया गया है। चुनाव में तरह तरह के आश्वासन दिए जाते रहे हैं पर होता कुछ नही है। रेलवे स्टेशनों से बंगला हटाया  जा रहा है ,बंगला में घोषणाए बंद कर दी जा रही है। प्रशासनिक भवनो मे बंगाला का स्थान नही। स्वतंत्रता सेनानियों के मुर्ति को विकृत किया जा रहा है। 
इतने सारे क्यो का जवाब हमे चाहिए। आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनाव मे यह हमारा मुख्य मुद्दा रहेगा मौके पर रानी शिव से बांग्ला भाषा और संस्कृति रक्षा समिति के सचिव गौतम चटर्जी साहिबगंज से हिमांशु गुहा टाटा से प्रेम सुंदर कर्मकार जामताड़ा विशेष सचिन घोष दुमका से विमल भूषण गुहा कानों से आशीष आचार्य विद्रो मित्रा, आशीष सिंहा,दिलीप कुमार राय समेत दर्जनों झारखंड बंगाली समिति के सदस्य उपस्थित थे!
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