4 जुलाई को ओलचिकी लागू कराने के लिये झारखंड बंद

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दुमका। दुमका में एक दिवसीय ओलचिकी हूल सम्मेलन का आयोजन किया गया है। सम्मेलन में संताल परगना प्रमंडल, हजारीबाग प्रमंडल सहित संताल परगना प्रमंडल के आदिवासी पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था के प्रतिनिधि प्रतिनिधि एवं समाज के लोग उपस्थित थे। पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था के अनुषंगी ईकाई, माझी परगना महाल, भारत जाकात माझी  परगना महाल, देश माझी परगना वैसी, संथाल परगना जगवार बैसी,आसेका,आइसवा, संथाल छात्र संगठन एवं अन्य कई समाजिक संगठनों को मिला कर बनी “ओलचिकी हूल बैसी” का गठन ओल चिकी लिपि प्रचार-प्रसार वह संरक्षण एवं संवर्धन करने हेतु किया गया है।     सम्मेलन आरंभ करने से पूर्व विभिन्न जिलों से आए लोगों द्वारा दुमका शहर में स्थित विभिन्न जगहों पर जा जा कर बाबा तिलका मांझी, बीर बांटा सिदो कान्हु मुर्मू,फुलो झानो मुर्मू, एवं बाबा साहेब डा भिमराव अम्बेडकर के मु्र्ति पर माल्यार्पण किया। 

सर्वप्रथम ओलचिकी लिपि समर्थकों ने जिला प्रशासन के रवैए से काफी नाराजगी जाहिर किया,। क्योंकि बैसी द्वारा सम्मेलन आयोजित हेतु इंडोर स्टेडियम आवंटित करने के लिए अनुमंडल पदाधिकारी को 7 जून 2023 को आवेदन दिया गया था लेकिन टालमाटोल करते हुए 16 जून की रात 8:30 बजे इंडोर स्टेडियम दुमका न देकर आउट डोर स्टेडियम दुमका आवंटित किया। इस खुले आसमान के नीचे चिलचिलाती धूप में तथा झमाझम बारिश में देश के मूलनिवासी आदिवासियों को कार्यक्रम करने के लिए माजबूर किया। और संताल समाज को सहयोग नहीं कारने के एवज मे जनप्रतिनिधियों को 2024 के विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक परिणाम भुगतना होगा।

   उपस्थित वाक्ताओ ने कहा कि वर्तमान में नई शिक्षा नीति 2020 के तहत प्रत्येक विद्यालय में प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में पढ़ाई किया जाना है, इसी संदर्भ में झारखंड सरकार द्वारा प्रत्येक भाषाओं का किताब व सामग्री तैयार किया जा रहा है। संथाली भाषा भारतीय संविधान के आठवीं अनुसूची में शामिल है इनका स्वतंत्र लिपि ओलचिकी है। Jcert के निदेशक महोदय द्वारा वर्ग तीसरा, चौथा एवं पांचवा का गणित व पर्यावरण विषय के किताब देवनागरी लिपि में छापने का निर्णय को हम विरोध करते हुए ओलचिकी लिपि से किताब छापने का आग्रह किया है। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव महोदय से भी पत्राचार किया है महामहिम राज्यपाल से भी इस संबंध में विचार-विमर्श हेतु समय मांगा गया मगर अब तक मुलाकात का समय नहीं मिला जो आदिवासी संथाल समाज का अपमान है। माननीय मुख्यमंत्री जी से भी इस संबंध में कई दौर की वार्ता हुई मगर समाधान का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है। जिससे आदिवासी संथाल समाज काफी आहत है। संताली भाषा के लिए ओलचिकी लिपि को हमारे पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, असम एवं पड़ोसी देश नेपाल सरकार ने भी पाठ्यक्रम में शामिल किया है। झारखंड राज्य में पूर्व की सरकार ने राजभवन के मुख्य द्वार से लेकर सभी शिक्षण संस्थानों, सरकारी कार्यालयों आदि जगहों पर ऑल चिकी लिपि से लिखवाया है। वर्तमान के झारखंड सरकार ने भी अपने विभिन्न योजनाओं का प्रचार प्रसार हेतु ओलचिकी लिपि से विज्ञापन निकाला जा रहा है। संताली भाषा ओलचिकी लिपि को साहित्य अकादमी नई दिल्ली, सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन लैंग्वेजेस, मैसूर सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों ने अंगीकृत करते हुए मान्यता दिया है।

झारखंड में भी विगत वर्ष 2005,   2007, 2009, 2016, 2019 में संथाली भाषा के लिए ओलचिकी लिपि से पुस्तकों का मुद्रित किया जा चुका है। अब सिर्फ 3,4,5 वर्ग का गणित एवं पर्यावरण का किताब ओलचिकी लिपि के बजाय देवनागरी लिपि से छापने का निर्णय संताली समाज को समझ में नहीं आ रहा है।

       संताली भाषा के  ओलचिकी लिपि को प्राथमिक स्तर से विश्वविद्यालय तक पढ़ाई आरंभ करने, पढ़ाने के लिए शिक्षकों की बहाली करने, भाषा संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु झारखंड में साहित्य अकादमी गठन करने, एवं संथाली भाषा को झारखंड में प्रथम राजभाषा बनाने के लिए विभिन्न संगठनों द्वारा वर्षों से आंदोलन करते हुए मांग रखते आ रहे हैं मगर अब तक किसी भी सरकार की ओर से सकारात्मक पहल नहीं होने से संथाली भाषा ओलचिकी लिपि का अपमान होते आ रहा है। साथ ही आदिवासी संताल समाज के संवैधानिक अधिकारों का हनन होता  रहा है, जिसे अब आदिवासी संथाल समाज किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं करेगा।

   इसलिए पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था के अनुषंगी इकाइयों का संगठन “ओलचिकी हूल वैसी” द्वारा आयोजित ओलचिकी हूल सम्मेलन में निम्नलिखित प्रस्ताव पारित किया गया।

राज्य सरकार को दिया अल्टीमेटम

 राज्य सरकार को 27 जून 2023 तक का अल्टीमेटम दिया गया और कहा कि यदि ओल चिकी लिपि का प्रचार-प्रसार हेतु प्रथमिक विद्यालय में पढ़ाई आरंभ नहीं हुआ और संरक्षण संवर्धन हेतु उचित पहल नहीं किया गया तो आगामी दिनांक  4 जुलाई 2023 को 24 घंटे के लिए संपूर्ण झारखंड बंद रखने की “ओलचिकी हूल बैसी” घोषणा करती है।

संताल परगना कमेटी का गठन

 प्रमंडल स्तरीय कमेटी गठन किया गया। कमेटी का अध्यक्ष राविनाथ टुडू, उपाध्यक्ष – एमेले मरांडी, आनंद मुर्मू , सचिव रविंद्र सोरेन, महेन्द्र हेमब्रोम, दीपाक मरांडी  के साथ साथ सभी जिलों से दो–दो सक्रिय सदस्या को शामिल किया गया है 15 दिन के अंदर सभी संथाल परगना के जिलों में जिला स्तरीय कमेटी बना कर राज्य स्तरीय कमेटी को सुचित करेगें।

वश्यक सेवा बंद में रहेगी बहाल

 झारखंड बंद के दौरान स्वास्थ्य सुविधा एम्बुलेंस, अस्पताल, नर्सिंग होम, दवा दुकान, स्वास्थ्य केंद्र को छोड़कर सभी सरकारी गैर सरकारी संस्थान, स्कूल, कॉलेज, सड़क, हाई-वे, परिवहन, दुकाने, बाजार, औद्योगिक प्रतिष्ठान एवं रेल सेवा सभी बंद रहेगा।

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