किसी भी हाल में बाजार समिति शुल्क मंजूर नहीं

आज से व्यापारी लगायेंगे काला बिल्ला 

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देवघर। राज्यपाल ने कृषि उपज एवं पशुधन विपणन एवं संवर्द्धन विधेयक पर कुछ सुझावों के साथ सहमति दे दी है और अब सरकार इस पर नियमावली बनाकर लागू करने की ओर कदम बढ़ाएगी। इस विधेयक के लागू होने से झारखण्ड के खाद्यान्न व्यवसायियों, राइस एवं फ्लोर मिलरों और सब्जी, फल सहित कृषि उपज व्यापार में 2 प्रतिशत अतिरिक्त बाजार समिति शुल्क एक बार फिर से लागू हो जाएगी। पूरे देश मे एक समान जीएसटी के कारण झारखण्ड में ये 2 प्रतिशत और 1 प्रतिशत अलग से बाजार समिति शुल्क यहां के खाद्य व्यवसाय और उद्योग की हालत खस्ता करेगी। क्योंकि किसी भी पड़ोसी राज्य बिहार, बंगाल, उड़ीसा में यह शुल्क नहीं है। अतः पड़ोसी राज्यों की तुलना में यहां खाद्य वस्तुओं की कीमत बढ़ जाएगी। इससे यहां का व्यापार कराह उठेगा, भ्रष्टाचार की जद में चला जाएगा। अतः व्यापारी वर्ग संघर्ष और सख्त आंदोलन का रुख करने को बाध्य हो रहा है वरना व्यापार चौपट होने का डर बना रहेगा तथा झारखण्ड से खाद्यान्न व्यवसाय को पलायन करना पड़ सकता है। राज्य में खाद्य वस्तुओं के दाम में वृद्धि होगी और आम जन सहित छोटे किसान, सब्जी उत्पादक, खुदरा व्यापारी, फल सब्जी विक्रेता सभी प्रभावित होंगे। मूलतः झारखण्ड कृषि उपज उत्पादक राज्य नहीं है बल्कि यहां का व्यवसाय अन्य राज्यों से आयातित वस्तुओं पर निर्भर है। इन विपरीत परिस्थितियों की आशंका के बावजूद उक्त कृषि विपणन एवं संवर्द्धन बिल को झारखण्ड की सरकार यहां के व्यापारियों पर लादने की कोशिश कर रही है।
ऐसे में देवघर के व्यापारी वर्ग में भी विरोध और आंदोलन के स्वर बुलंद होने लगी है। इसी परिपेक्ष्य में आज देवघर के 11 व्यापारिक संगठन मिलकर विरोध और आन्दोलन की रणनीति बनाने हेतु प्रकाश भंडार में एक सामूहिक बैठक किया। बैठक में इस बिल के विरुद्ध व्यापारिक एकता का जोरदार प्रदर्शन और व्यापार बन्द करने तक का आंदोलन करने की सहमति बनी। फेडरेशन ऑफ झारखण्ड चैम्बर द्वारा तय रणनीति पर देवघर के सभी व्यवसायी आन्दोलन का रुख करेंगे। इसके तहत कल से सभी व्यवसायी काला बिल्ला लगाकर विरोध दर्ज कराते हुए व्यापार करेंगे। फेडरेशन द्वारा 8 फरवरी को बुलाए गए राज्य स्तरीय सम्मेलन में देवघर से 20 से अधिक लोग जाएंगे और वहां कारगर रणनीति तैयार करने में सहभागी बनेंगे। सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि देवघर के व्यवसायी सीधे आवक बंदी से आंदोलन शुरू करने का पक्ष लेगी और जरूरत पड़ी तो शटर डाउन करने से भी परहेज नहीं करेगी। देवघर के व्यवसायी बन्दी से भी पीछे नहीं हटेंगे। झारखण्ड के व्यापारी किसी भी कीमत पर बाजार समिति शुल्क को लागू नहीं होने देने के लिए कृतसंकल्पित हैं। व्यापारी भ्रष्टाचार की जड़ में रहे पूरे बाजार समिति को ही भंग किए जाने की पक्षधर है।
आज की बैठक की अध्यक्षता संताल परगना चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज, देवघर के अध्यक्ष आलोक मल्लिक ने किया और बैठक में देवघर चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष रवि केशरी, संप चैम्बर के पूर्व अध्यक्ष गोपाल कृष्ण शर्मा, राइस मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष रमेश बाजला सहित राइस मिलर राजकिशोर चौधरी, प्रदीप खेतान, श्याम माहेश्वरी, खुदरा दुकानदार संघ के अधिकारी ममता द्वारी, अशोक सरावगी, पवन बर्णवाल, बाजार समिति के अध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह, थोक खाद्यान्न व्यवसायी गणेश भालोटिया, राजेश टिबरेवाल, विवेक अग्रवाल, राजेश जैन, संप चैम्बर के महासचिव प्रमोद छावछारिया, उपाध्यक्ष उमेश राजपाल, पीयूष जायसवाल, कोषाध्यक्ष दीपक सरैंया, अधिकारी संजीव झा, अजय कुमार, पशु आहार व्यवसायी अशोक जैन, व्यवसायी संजय अग्रवाल, गौतम जालान, संतोष केशरी, राजेश गुप्ता, रविश कुमार, शेखर गुप्ता, सुबोध मिश्रा, पंकज भालोटिया सहित दर्जनों व्यवसायी शामिल हुए।
बैठक में निम्नलिखित व्यावसायिक संगठनों और व्यापारी वर्ग ने भाग लिया
1. संप चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज, देवघर
2. देवघर चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज
3. खुदरा दुकानदार संघ
4. राइस मिल एसोसिएशन
5. बाजार समिति
6. फल विक्रेता संघ
7. सब्जी विक्रेता संघ
8. आलू-प्याज थोक विक्रेता संघ
9. चुरा-पेड़ा विक्रेता संघ
10. सभी थोक खाद्यान्न विक्रेता
11. सभी पशु आहार विक्रेता
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