राज्य में खनिज संपदा की लूट, विभिन्न विभागों में भ्रष्टाचार चरम पर
कृषि क्षेत्र को मरणासन्न स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया
देवघर। हेमंत सोरेन सरकार द्वारा विधानसभा में पेश किए बजट पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए विधायक नारायण दास ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि जो केंद्र द्वारा स्वीकृत की जाती है उसमें अतिरिक्त एक से डेढ़ लाख रुपैया देकर परिवार के मुखिया या महिलाओं के लिए अतिरिक्त कमरे का निर्माण कराएगी। बजट में बोला गया कि अपने संसाधनों से राजस्व उड़ीसा की तर्ज पर इकट्ठा करेंगे परंतु इनके शासनकाल में पुलिस प्रशासन द्वारा ही सत्ता संरक्षण देकर अपने राज्य के संसाधनों के दोहन कर रही है। तो कहां से सरकार को राजस्व की प्राप्ति होगी। यह वर्तमान सरकार की चौथी बजट है। बजट के आकार को देखने से पता चलता है राज्य का भला वर्तमान सरकार से नहीं हो सकता। पिछले बजट 22,23,11, 101 करोड़ का था जो मात्र बढ़कर 116418 करोड़ का किया गया। विकास कैसे होगा मात्र 15 हजार करोड़ की अधिकता क्योंकि सभी क्षेत्रों पर न तो इनकी नीति स्पष्ट है और न ही नियत साफ। आपको ज्ञात होगा कि इनका निश्चय पत्र और संकल्प पत्र चुनाव पूर्व जो इन्होंने अपने निश्चय पत्र संकल्प पत्र से राज्य की विकास की जो इन्होंने वादे किए हुए इनके कार्य करने की नियत ठीक उसके विपरीत 3 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं इनके कार्यकाल में पहला नियोजन नीति के बदले नमाज नीति, दूसरा सीए को निरस्त कर वोट बैंक की राजनीति का चयन येन-केन प्रकारेण सत्ता प्राप्त करने हेतु तुष्टिकरण को पोषित करने की राजनीति। केंद्रीय बजट को झारखंड सरकार अपने बजट में कॉपी की है या तो वही योजनाओं को लाने का कार्य किया है जिससे स्पष्ट है कि इनकी अपनी कोई नीति, नीयत और विजन नहीं है और न ही कार्य पद्धति में पारदर्शिता। 3 वर्षों में कोई विधानसभा क्षेत्र में 3 किलोमीटर 5 किलोमीटर 10 किलोमीटर ही ग्रामीण पथ का निर्माण केंद्रीय प्रायोजित योजना का धीमी गति से संचालन या रोकने का कार्य कर रही है, जिससे राज्य की विकास की रथ इन के शासनकाल में रुक गई है। जल संसाधन क्षेत्र में बहुउद्देशीय योजनाओं का सिर्फ प्राक्कलन राशि बढ़ाकर बंदरबांट किया जा रहा है। धान अधिप्राप्ति, खाद्य आपूर्ति, स्कूली शिक्षा और स्वास्थ्य पर कोई स्पष्ट फोकस नहीं किया गया है। राज्य में खनिज संपदा की लूट जिसका असर राजस्व पर भी पड़ा है। राज्य में विभिन्न विभागों में भ्रष्ट अफसरों का कारनामा जो ईडी के माध्यम से उजागर हो रहे हैं। सिंचाई योजना पर बजट में कोई विशेष प्रावधान नहीं। इन्होंने कृषि क्षेत्र को मरणासन्न स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है। पहले वर्ष में कहा कि खजाना खाली, जब लिखित रूप में मांग की गई तो सरकार द्वारा कहा गया कि खजाना खाली नहीं हो सकता। दूसरे वर्ष और तीसरे वर्ष कोरोना का हवाला दिया और अब जो इनकी योजना टालमटोल और भ्रम का वातावरण बनाने वाली योजनाओं इन्होंने चुनाव से पूर्व यहां के बेरोजगार युवक को स्थानीयता नीति लाकर भरम का वातावरण पैदा कर एक दूसरे को लड़ा कर विभाजनकारी नीति लाई। जिसे न्यायालय ने भी अस्वीकृत कर दिया है। प्रतियोगिता परीक्षा में हिंदी अंग्रेजी और संस्कृत की अवहेलना की, जबकि राज्य में हिंदी बोलने लिखने और पढ़ने वाला की संख्या 65 से 70% की है बावजूद इसके उर्दू प्रतिस्थापित करने का कार्य किया जो कि मात्र 07.0 8 परसेंट की आबादी है।
The short URL of the present article is: https://bharatbulletin.in/5xql