पीएलएफआई के सुप्रीमो दिनेश गोप को एनआईए ने लिया आठ दिनों के रिमांड पर

बोकारो  I प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन पीएलएफआई के सुप्रीमो दिनेश गोप से एनआईए और झारखंड पुलिस 8 दिनों तक पूछताछ करेगी. कोर्ट ने इसकी इजाजत दे दी है. सोमवार को दिनेश गोप को कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट के सामने पेश किया गया. इस दौरान एनआईए ने दिनेश गोप को 15 दिनों की रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की इजाजत कोर्ट से मांगी, लेकिन कोर्ट ने सिर्फ 8 दिनों की रिमांड की मंजूरी दी है. रिमांड की अवधि आज से ही शुरु हो गई है.

कल दिल्ली से लाया गया था रांची

बता दें कल शाम ही नेपाल से गिरफ्तार पीएलएफआई सुप्रीमो दिनेश गोप विमान से कड़ी सुरक्षा में रांची लाया गया. जहां उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा. इस से पहले नेपाल में पंजाबी के वेश बनाकर रह रहे दिनेश गोप को गिरफ्तार कर दिल्ली लाया गया था. जहां से उसे रांची लाया गया. दिनेश गोप के ऊपर झारखंड पुलिस ने 25 लाख का इनाम घोषित कर रखा था. वहीं एनआईए ने भी उसपर 5 लाख का इनाम घोषित किया था. एनआईए और झारखंड पुलिस ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की है. और उसे नेपाल या दिल्ली से धर दबोचा है. 30 लाख के इनामी दिनेश गोप के खिलाफ झारखंड के कई थानों में 150 से ज्यादा केस दर्ज हैं. कई बार वो जवानों के साथ उग्रवादियों की हुई मुठभेड़ में बचकर निकल चुका था. जाना था सेना में, लेकिन बन गया उग्रवादी ,रांची से 35 किमी दूर खूंटी जिले के जरियागढ़ थाना क्षेत्र में लाप्पा मोहराटोली गांव का रहने वाला दिनेश गोप सेना में जवान बनने की जगह एक उग्रवादी बन गया. बताया जाता है उसका चयन सेना की नौकरी के लिये हुआ था. सेना की ओर से ज्वाइन करने के लिए उसे चिट्टी भी भेजी गयी थी, लेकिन गांव के दबंगों ने इस चिट्टी को कभी उसके घर पहुंचने ही नहीं दिया. जब इसकी जानकारी दिनेश गोप के भाई सुरेश गोप को हुई, तो उसने इसका विरोध किया और दबंगों के खिलाफ बगावत करनी शुरू कर दी. कई लोग सुरेश गोप का संबंध नक्सलियों से होने की बात भी करते हैं. इसी बीच वर्ष 2000 में पुलिस की गोली से सुरेश गोप की मौत गयी और दिनेश गोप ओडिशा भाग गया. कुछ दिन बाद वह फिर इलाके में लौटा. पर उस समय तक उसका नाम और काम दोनों बदल चुके थे. अब वह गांव का दिनेश नहीं बल्कि एक ऐसे गिरोह का सरगना था, जिनके हाथों में बंदूकें थीं.

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