आर्थिक नाकेबंदी की वजह से वाहनों का परिचालन पूरी तरह से ठप , बाजार से लेकर बस पड़ाव में सन्नाटा पसरा
दुमका I मिशन 2024 की तैयारियां चल रही है। 2024 में देश में होनेवाले लोकसभा चुनाव को देखते हुए अब सारी राजनीतिक पार्टियां अलर्ट मोड पर अपने अपने रणनीतिकारों के साथ सियासी बिसात पर गोटियां बिछा रही है। झारखण्ड के लिए मिशन 2024 महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ लोकसभा चुनाव के बाद विधानसभा चुनाव भी होना है। अगले साल लोकसभा और विधानसभा के होनेवाले चुनाव की सभी राजनीतिक दलों ने तैयारी भी शुरू कर दी है लेकिन इन सब के बीच अलग राज्य बनने के बाद झारखण्ड की सियासत में कुछ चुनावी मुद्दे आज तक नहीं सुलझे और उन्हीं मुद्दों में एक है स्थानीयता व नियोजन नीति। झारखण्ड बंद है। शनिवार एवं रविवार को राज्य के आदिवासी व मूलवासी छात्र एवं आमलोग सड़कों पर रहेंगे। मुद्दा झारखण्ड में अब तक किसी ठोस स्थानीयता व नियोजन नीति का नहीं बनना, परिभाषित नहीं होना। राज्य गठन के 22 वर्षों के इतिहास में कई सरकारें बनी। अलग अलग राजनीतिक दलों को सत्ता में बैठने का मौका मिला लेकिन जब भी स्थानीयता व नियोजन नीति पर चर्चा हुई या फिर सरकार उसपर आगे बढ़ी तो राज्य में उसका किसी ना किसी रूप में विरोध हुआ। राज्य की मौजूदा हेमंत सरकार ने 60 : 40 के तर्ज पर नियोजन नीति लागू करना चाहती है पर इसका विरोध शुरू हो गया। झारखण्ड के आदिवासी व मूलवासियों को यह नीति मंजूर नहीं है क्योंकि उसके पीछे इनका अपना तर्क है और फिर इसका विरोध करते हुए कई आंदोलन हुए और अब इस आंदोलन का स्वरूप बदलते हुए उग्र होता जा रहा है।शनिवार को छात्र समन्वय समिति के नेतृत्व में आदिवासी व मूलवासी छात्र एवं आमलोग दुमका के महत्वपूर्ण चौक चौराहों पर उतर गए। 60:40 नियोजन नीति के मुद्दे पर बंद समर्थक काफी आक्रोशित दिखे। 48 घंटे का झारखण्ड बंद है। आर्थिक नाकेबंदी की वजह से वाहनों का परिचालन पूरी तरह से ठप है। बाजार से लेकर बस पड़ाव में सन्नाटा पसरा हुआ है। इक्के दुक्के दुकान एवं प्रतिष्ठान खुले दिखे। व्यवसायी दुकानों के बाहर वेट एंड वाच की स्थिति में दिखे। आपातकालीन सेवाएं चालू है। जगह जगह पर सुरक्षा के लिहाज से पुलिस जवान मुस्तैद है। शहर में बंद का मिलाजुला असर दिखा। वहीं छात्र नेता आंदोलन को सफल बनाने में कोई कोर कसर नही छोड़ना चाहते। छात्र नेता के मुताबिक अगर इस आंदोलन के बाद भी सरकार अपने फैसले को वापस नही लेती तो आंदोलन का स्वरूप उग्र होगा, अनिश्चितकालीन बंदी और आर्थिक नाकेबंदी की जाएगी। रेल सेवाएं बाधित की जाएगी।
छात्र नेता राजीव बास्की ने कहा कि आदिवासी और मूलवासी के मुद्दे पर राजनीति चमकाने वाली झामुमो के प्रतिनिधियों को राज्य की जनता ने बड़ी उम्मीदों के साथ सत्ता पर बैठाया था लेकिन आज झामुमो ‘बाहरियों’ को नौकरी और रेवड़ियां बांट रही है। कहा कि अब यहाँ के नौजवान व युवा ‘बाहर’ के सांसद और विधायकों को खदेड़ने का काम करेंगे। स्थानीय जनप्रतिनिधि को भी 2024 में आईना दिखाया जाएगा। कहा कि 60:40 नियोजन नीति जबरन थोपा जा रहा है। झारखण्ड की सत्ता में अधिकांश समय तक रहनेवाली भाजपा ने भी कभी यहाँ के आदिवासी व मूलवासियों की चिंता नहीं की। राज्य में स्थानीय, नियोजन और चाहे विस्थापन नीति की बात हो, कोई भी नीति आज तक ठोस नही बनी तो जनता कैसे खुशहाल रहेगी। छात्र नेता श्यामदेव हेम्ब्रम ने कहा कि मुख्यमंत्री को सत्ता का गुमान है लेकिन जिस झारखण्ड की जनता ने सीएम को सत्ता पर बैठाया वही जनता अगले चुनाव में उतारने का काम करेगी। हमलोगों ने इतनी बार संवैधानिक तरीके से आंदोलन किया लेकिन सीएम के कानों में जूं तक नहीं रेंगा। छात्र नेता राजेन्द्र मुर्मू ने कहा कि यह लोकतंत्र है और हमारी आवाज को सरकार दबा रही है। हमारी तो बस यही मांग है कि अंतिम सर्वे सेटेलमेंट के खतियान को आधार बनाकर नियोजन नीति बनायी जाए।
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