पी एम मोदी ने प्रकाश सिंह बादल को श्रद्धांजलि दी:पूर्व सी एम का कल बादल गांव में अंतिम संस्कार होगा, शव यात्रा में फूल बरस रहे

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चंडीगढ़, (वासु के मेहता हरियाणा पॉलिटिकल ब्यूरो प्रमुख):। पंजाब के पूर्व सी एम प्रकाश सिंह बादल की पार्थिव देह अंतिम दर्शन के लिए चंडीगढ़ स्थित अकाली दल के कार्यालय में रखी गई। जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। अंतिम दर्शन के बाद उनका शव पैतृक गांव बादल ले जाया जा रहा है। जहां कल दोपहर 1 बजे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
बादल की पार्थिव देह देर शाम तक चंडीगढ़ से राजपुरा, पटियाला, संगरूर और बठिंडा होते हुए मुक्तसर जिले में पड़ते बादल गांव पहुंचेगी। गांव के श्मशान घाट में जगह कम होने के कारण पूर्व सीएम का अंतिम संस्कार उनके पुश्तैनी खेतों में किया जाएगा। इसके लिए दो एकड़ में लगा किन्नू का बाग उखाड़कर चबूतरा बनाने का काम चल रहा है।
बादल का मंगलवार रात को 95 साल की उम्र में निधन हो गया था। उन्हें सांस लेने में तकलीफ के बाद 16 अप्रैल को मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां 25 अप्रैल की शाम 7.42 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। प्रकाश सिंह बादल 5 बार पंजाब के मुख्यमंत्री रहे।

देश के सबसे बुजुर्ग नेता, 2 दिन का राष्ट्रीय शोक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा हरियाणा विधानसभा के स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता, पंजाब की पूर्व सी एम राजिंदर कौर भट्‌ठल, हरियाणा के पूर्व सी एम ओमप्रकाश चौटाला, पंजाब के पूर्व सी एम कैप्टन अमरिंदर सिंह की सांसद पत्नी परनीत कौर, भाजपा नेता सुनील जाखड़ समेत तमाम नेताओं ने बादल को श्रद्धांजलि दी। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने चिट्ठी लिखकर शोक जाहिर किया।
प्रकाश सिंह बादल देश की राजनीति के सबसे बुजुर्ग नेता थे। उनके निधन पर केंद्र सरकार ने दो दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है। इस दौरान पूरे देश में लगा राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा। सभी आधिकारिक मनोरंजन कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं। पंजाब में कल गुरुवार को सरकारी छुट्‌टी की घोषणा की गई है।

नरेंद्र मोदी भी प्रकाश सिंह बादल के पैर छूते थे
भारतीय राजनीति में प्रकाश सिंह बादल के कद का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनके पैर छूते थे। 75 साल के राजनीतिक जीवन के दौरान बादल 5 बार पंजाब के मुख्यमंत्री बने। उन्होंने लगातार 11 चुनाव जीते। वर्ष 2022 में बादल अपनी परंपरागत सीट लंबी से चुनाव हार गए थे। उसके बाद वह सियासी तौर पर ज्यादा सक्रिय नहीं रहे। केंद्र सरकार के कृषि सुधार कानूनों का विरोध हुआ तो उनकी पार्टी शिरोमणि अकाली दल ने भाजपा से गठबंधन तोड़ लिया था। इसके बाद प्रकाश सिंह बादल ने अपना पद्म विभूषण तक लौटा दिया था।
20 साल की उम्र में सरपंच बनने के बाद प्रकाश सिंह बादल करीब 75 साल के अपने सियासी जीवन में हमेशा राजनीति के केंद्र में रहे। पंजाब की राजनीति का उन्हें बाबा बोहड़ तक कहा गया, वहीं केंद्र में भी उनकी दहाड़ हमेशा ऊंची रही। जनसंघ और भाजपा की तरफ झुकी राजनीति के वे प्रमुख चेहरों में शुमार रहे। भाजपा ने भी उन्हें कभी नजरअंदाज नहीं किया।
इसके बावजूद बादल केंद्र की राजनीति में अधिक समय नहीं ठहरे। मार्च 1977 में केंद्र में मोरारजी देसाई की जनता पार्टी की सरकार बनी तो प्रकाश सिंह बादल उसमें केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री बनाए गए। कुछ समय बाद लोकसभा में भी चुने गए, लेकिन केंद्र की राजनीति उन्हें पसंद नहीं आई। कुछ महीनों बाद ही केंद्रीय मंत्री का पद छोड़ दिया। उसके बाद वह पंजाब की राजनीति से बाहर नहीं निकले।

पहली चुनावी जीत के बाद गांव का नाम अपने साथ जोड़ा
प्रकाश सिंह बादल का असली नाम प्रकाश सिंह ढिल्लों था। पहली बार अपने पैतृक गांव बादल के सरपंच चुने गए। तब उनकी उम्र महज 20 साल थी। फिर बादल का अगला पड़ाव आया लंबी ब्लॉक समिति का चुनाव। गांव का सरपंच बनने के कुछ समय बाद ही वे लंबी ब्लॉक समिति के प्रधान चुन लिए गए।
प्रकाश सिंह ने बादल की तरह लंबी को भी हमेशा के लिए अपने साथ जोड़ लिया। पहली बार 1957 से लेकर 2017 तक 10 बार पंजाब विधानसभा में उन्होंने लंबी सीट का प्रतिनिधित्व किया। 94 साल की उम्र में अपने आखिरी चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी (AAP) की लहर में उन्हें इसी सीट से हार का सामना करना पड़ा।

पत्नी का निधन हुआ तो शुरू की कैंसर के खिलाफ मुहिम
24 मई 2011 को पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की पत्नी सुरिंदर कौर बादल का कैंसर से लंबी लड़ाई के बाद चंडीगढ़ PGI में निधन हो गया था। तब सुरिंदर कौर 72 साल की थी और उन्हें गले का कैंसर था। पत्नी के देहांत के बाद मुख्यमंत्री रहते हुए प्रकाश सिंह बादल ने राज्य में कैंसर के खिलाफ मुहिम छेड़ दी थी। घर-घर में कैंसर के मरीजों की जांच करवाई गई।
इतना ही नहीं, सरकारी अस्पतालों में कैंसर मरीजों के इलाज में तेजी भी पूर्व मुख्यमंत्री के कारण ही संभव हुई थी। सीएम रिलीफ फंड भी प्रकाश सिंह बादल ने शुरू करवाया, जिसमें कैंसर के मरीजों की फाइल पास होने के बाद उन्हें आर्थिक मदद दी जाती थी।

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