रिश्तेदार, शुभचिंतक, ग्रामीण कफन के बदले परिजनों को सहयोग राशि देकर मदद करेंगे
चरही | चुरचू प्रखंड के आदिवासी बहुल गांव कजरी भुरकुंडा में सोमवर को एक 40 वर्षीय झरी मांझी उर्फ बंडा मांझी के निधन पर संताल समाज के लोगों ने कफन प्रथा को समाप्त करने को लेकर एक महत्वपूर्ण विचार- विमर्श किया गया। जिसमें कजरी भुरकुंडा मांझी बाबा ने अंतिम संस्कार में आए दूर दराज के सभी संताल रिश्तेदारों, शुभचिंतकों से इस मुद्दे को लेकर दो शब्द विचार आमंत्रित किए गए। सभी ने इस विषय पर बारी – बारी से अपने विचार रखे। और सर्वसहमति से इस मुद्दे को लेकर संशोधन करते हुए कफन प्रथा को समाप्त कर दुखित परिवार के परिजनों को सहयोग राशि देकर सहायत प्रदान किया जाना चाहिए पर सहमति दी गई। जिससे दुखित परिवार के लोगों को आगे अन्य परंपरा निर्वाहन करने में मदद मिलेगी। आगे बताया कि कफन सिर्फ घर और अपने गोतिया के लोग ही देंगे। बाकी अन्य रिश्तेदार, गांव के ग्रामीण कफन नही लाएंगे। उसके जगह में सहायता राशि देकर परिजनों को मदद करेंगे। साथ ही मृत आत्मा के शांति के लिए 2 मिनट का मौन रखने का नियम भी पारित किया गया। अंतिम संस्कार में जोड़ाकारम, परसाबेड़ा, रामदागा, बहेरा, फूसरी, बदुलतवा, फागूटोला, चनारो, लगनाबेड़ा सहित अन्य जगह से लोग शामिल हुए। मौके पर बीस सूत्री उपाध्यक्ष लाखीराम मांझी, श्याम मरांडी, मनोज मुर्मू, विंसेंट टुडू, रबी मुर्मू, किसान मुर्मू, प्रभू मुर्मू, मांगरा मांझी, समाजसेवी संजय मुर्मू, समाजसेवी आनंद मरांडी, महादेव मांझी, सहित गांव के अन्य ग्रामीण उपस्थित थे।
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