शिक्षा और समाज को बदलने वाली भारत की पहली महिला शिक्षिका सावित्री बाई फुले को जन्म दिन पर डॉ. जे.सी राज ने किया नमन
देवघर। शिक्षा और समाज को बदलने वाली भारत की पहली महिला शिक्षक सावित्री बाई फुले को उनके जन्मदिन पर संत माइकल एंग्लो विद्यालय के चेयरमैन डॉ. जे.सी.राज ने याद करते हुए कहा कि 19वीं सदी में स्त्रियों के अधिकारों, अशिक्षा, छुआछूत, सतीप्रथा, बाल या विधवा-विवाह जैसी कुरीतियों पर आवाज उठाने वाली देश की पहली महिला शिक्षिका सावित्री बाई फुले जिन्होंने अपने पति दलित चिंतक समाज सुधारक ज्योति राव फुले से पढ़कर सामाजिक चेतना फैलाते हुए अंधविश्वास और रूढ़ियों की बेड़ियां तोड़ने के लिए लंबा संघर्ष किया। डॉ. राज ने एक प्रसंग को याद करते हुए कहा कि जिस दौर में वो पढ़ने का सपना देख रही थीं, तब दलितों के साथ बहुत भेदभाव होता था। शिक्षा का हक़ केवल उच्च जाति के पुरुषों को ही है, दलित और महिलाओं को शिक्षा ग्रहण करना पाप था। बस उसी दिन सावित्री बाई फूले ने प्रण कर बैठीं कि कुछ भी हो जाए वो एक न एक दिन पढ़ना जरूर सीखेंगी। वही लगन थी कि एक दिन उन्होंने खुद पढ़कर अपने पति ज्योतिबा राव फुले के साथ मिलकर लड़कियों के लिए 18 स्कूल खोले। डॉ. राज ने कहा कि साल 1848 में महाराष्ट्र के पुणे में देश का सबसे पहले बालिका स्कूल की स्थापना की थी।
वहीं, अठारहवां स्कूल भी पुणे में ही खोला गया था।
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