वेलेंटाइन डे पर मनोविज्ञान विभाग में सेमिनार

222222222222222

दुमका। सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर मनोविज्ञान विभाग में  विभागाध्यक्ष डॉ विनोद कुमार शर्मा की अध्यक्षता में वेलेंटाइन दिवस के अवसर पर ‘ युवाओं में प्रेम का व्यवहारिक अर्थ’ विषय पर एक विभागीय सेमिनार का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत व विषय प्रवेश करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ विनोद कुमार शर्मा ने कहा कि  युवाओं ने प्रेम को संकीर्ण व विचलित बना दिया है. प्रेम को लैंगिक इच्छा पूर्ति का साधन मानता है जिसके पूर्ति न होने या बाधा होने पर पेट्रोल कांड, तेजाब कांड आदि से लेकर हत्या व आत्महत्या जैसे अमानवीय घटनाओं का अंजाम देता है. साथ ही प्रेम को असफल मानने वाले लोग मानसिक विकृतियों का शिकार होते है.     मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अंग्रेजी विभाग के प्रोफेसर डॉ परमानंद प्रसाद सिंह ने कहा कि प्रेम में त्याग व समर्पण का भाव होता है जहाँ लोग शारीरिक संबंधों से जोड़ दिया है. प्रेम को सेक्स से जोड़ दिया है. प्रेम को वस्तु बना दिया है जहाँ बड़े बड़े कंपनियों में प्रमोशन या कुर्सी पाने के लिए पत्नी को आगे बढ़ा देते है जबकि प्रेम की व्यापकता सभी जीवों के प्रति लगाव, देखरेख व सम्मान देने से है. ईश्वर के आस्था व विश्वास से है जो आत्मिक निःस्वार्थ भाव से होता है. उन्होंने सूरदास, तुलसीदास, मीराबाई, लैला- मजनू, आदि के प्रेम को उदाहरण देते हुए कहा कि विश्व बसुधैव कुटुंब की बात की जहाँ संपूर्ण जगत को एक परिवार मानकर मानवीय व्यवहार करना भी प्रेम है बतलाया. मौके पर हिन्दी विभागाध्यक्ष व पूर्व मानविकी डीन डॉ विनय कुमार सिन्हा ने कहा है कि प्रेम को मानवों तक सीमित व संकुचित न रख बल्कि कहे यह प्रेम भाव सभी जीवों में होता है. प्रेम का वर्तमान प्रचलित सेक्स संबंध कदापि नही हो सकता है. ऐसा प्रेम व्यापार कहा जायेगा जहाँ लड़के या लड़कियाँ लाभ को देखकर रिश्ते जोड़ने का प्रयास करती है. प्रेम देश, समाज, परिवार, व्यवसाय आदि से होना चाहिए. समाज व राष्ट्र को संगढ़ित व सुसज्जित बनाना भी प्रेम है. युवाओं को प्रेम की संकीर्णताओं से बाहर निकलकर व्यवहार करना चाहिए जिससे देश की संस्कृति धूमिल न हो.    वही विधार्थियो ने कहा कि किताब में ध्यान लगाना  प्रेम का  उदाहरण बतलाया तो वही माँ – बाप व गुरुजनों के प्रति आदर-सम्मान का भाव रखकर जीवन लक्ष्य पर चलना भी स्व प्रेम है. रिसर्च स्कॉलर में दिव्या रानी, हीना परवीन, मुनी हाँसदा, निशा कुमारी व श्री जतन मरांडी ने भी प्रेम की संकीर्णताओं से बाहर निकलकर प्रेम को अपनाने की सलाह दी. कार्यक्रम में मंच संचालन सुबोध हंसदा ने किया. इस कार्यक्रम को सफल बनाने में मनोज बस्की, साहेब मुर्मू, सुमित झा, सीमा कुमारी, ललिता मरांडी, सीमा लकड़ा, आदि न महत्वपूर्ण कार्य किया.

The short URL of the present article is: https://bharatbulletin.in/9r30

Leave a Comment

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *