शिकारीपाड़ा महाविधालय में एनएसएस यूनिट 02 द्वारा मनाया गया सुभाष चंद्र बोस की जयंती

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शिकारीपाड़ा/दुमका/ आज 23 जनवरी 2023 को शिकारीपाड़ा महाविद्यालय ,शिकारीपाड़ा में सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर एनएसएस यूनिट टू की प्रोग्राम ऑफिसर डॉ अनुराधा जयसवाल की अगुवाई में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय  में वाद विवाद प्रतियोगिता ,निबंध प्रतियोगिता, चित्र लेखन प्रतियोगिता  एवं भाषण प्रतियोगिता इत्यादि का आयोजन किया गया। इसमें महाविद्यालय के अनेक छात्र छात्रा उपस्थित होकर भाग लिए तथा अपना उत्कृष्ट प्रदर्शन किए जिसमे सुभम कुमार सिंह, विपुल साहा,विकास कुमार भंडारी, सुष्मिता जयंत,राखी आदि मुख्य भूमिका में नजर आए। इसमें महाविद्यालय के वरीय शिक्षक प्रो. सपन कुमार दान , प्रो. रफाएल मरांडी ,प्रो. नीतू सिंह, पुष्पजीत गुप्ता, दीपक कुमार पाल मुख्य रूप से उपस्थित थे तथा अपने महत्वपूर्ण विचार शिक्षकों एवं छात्रों के बीच साझा किए।इस अवसर पर महाविद्यालय के  छात्र छात्रा द्वारा  सुभाष चंद्र बोस की जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाया गया।  इस अवसर पर डॉ अनुराधा ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बतलाया कि सुभाष चंद्र बोस गरम दल के नेता थे तथा देश की आजादी के लिए उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ,अपने शौर्य ,पराक्रम के बल पर अंग्रेजों को भारत छोड़ने के लिए मजबूर किया। उनका ऊर्जावान नारा तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा ,जय हिंद आदि  नारा आज भी प्रासंगिक है तथा हमें बहुत बड़ा संदेश देता है ।हमारे मन में जब जोश, उत्साह और लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अटल विश्वास हो तो हमें अवश्य ही उस लक्ष्य की प्राप्ति होती है। हमें ऐसा सुभाष चंद्र बोस के व्यक्तित्व   से सीखने को मिलता है। महाविद्यालय के वरीय शिक्षक प्रो. सपन कुमार दान ने यह बतलाया कि सुभाष चंद्र बोस बहुत ही विद्वान  एवं पराक्रमी थे ।  उन्होंने आईसीएस की परीक्षा पास की थी जिसे आज हम आईएएस कहतेहैं परंतु देश की आजादी के लिए उन्होंने इस सेवा को छोड़ दी तथा देश की आजादी के लिए अपने बलिदान दे दिए। कार्यक्रम को  आगे बढ़ाते हुए महाविद्यालय की प्रोफेसर नीतू सिंह  ने बतलाया कि हमें सुभाष चंद्र बोस के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए कि यदि हम किसी चीज को ठान लेते हैं तो उसके लिए हमें अपनी पूरी निष्ठा से उस काम को करने के लिए तत्पर रहना चाहिए और सिर्फ इसी जज्बा के कारण सुभाष बाबू  देश की आजादी के लिए कृत संकल्प थे और अंग्रेजों को भारत से भगाने के लिए उन्होंने विदेश में जाकर आजाद हिंद फौज का  गठन किया तथा देश की आजादी में इनके इस  दल का बहुत बड़ा योगदान रहा।कार्यक्रम सफल रहा तथा स्वयंसेवकों ने इसे हर वर्ष पराक्रम दिवस के रूप में मनाने का संकल्प किया।

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