रेल विस्थापितों को बसाने की कवायद शुरु

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निरसा I  फ्रेट कोरिडोर (रेल विस्तारीकरण) को लेकर रेलवे द्वारा विस्थापित शिवलीबाड़ी मध्य एवं एग्यारकुण्ड दक्षिण पंचायत के आदिवासी टोला के करीब साठ परिवार को बसाने की कवायद शुरू कर दी गयी है। एग्यारकुण्ड सीओ अमृता कुमारी के निर्देश पर सीआई अशोक मिश्रा एवं कर्मचारी परमेश्वर महतो अमीन के साथ टोला पहुंचे। विस्थापित परिवार से मिले व उनकी समस्या सुनी। इसके बाद गैर आबाद सरकारी जमीन चिन्हित करने के लिए स्थल का निरीक्षण किया। सीआई मिश्रा ने कहा कि दुधियापानी में खाली पड़ी गैर आबाद जमीन पर विस्थापित परिवारों को बसाने की पहल की जा रही है। फिलहाल टीम के पास नक्शा नहीं है। बहुत जल्द नक्शा के साथ जमीन को चिन्हित किया जायेगा। जमीन को चिन्हित कर इसकी रिपोर्ट सीओ को भेज दी जायेगी। वहीं विस्थापित आदिवासी परिवार ने टोला के पास ही एग्यारकुण्ड मौजा के खाली पड़ी गैर आबाद जमीन पर बसाने की मांग की। कहा कि दुधियापानी में पानी एवं पक्की सड़क की व्यवस्था नहीं है। जीटी रोड से भी दूरी हो जायेगी। इतना ही नहीं उक्त जमीन पंचमोहली पंचायत में है। जिससे परेशानी होगी। मुखिया अजय राम ने भी एग्यारकुण्ड मौजा की जमीन पर पुनर्वास की व्यवस्था की मांग की। इसपर सीआई मिश्रा ने कहा कि एग्यारकुण्ड मौजा की खाली जमीन पर विवाद है। इसलिए इस जमीन पर पुनर्वास की व्यवस्था नहीं हो सकती है। ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े हुए हैं। कहा कि उक्त जमीन पर कोई विवाद नहीं है। वे लोग एग्यारकुण्ड मौजा के गैर आबाद 138 खाते का 1950 नंबर प्लाट को चिन्हित कर पत्र के माध्यम से सीओ को अवगत करा दिया है। कहा कि उक्त प्लाट में करीब एक एकड़ जमीन है। यहां हमें आसानी से पुनर्वासित किया जा सकता है। लेकिन सीआई ने इसमें दिलचस्पी नहीं दिखायी। बता दें कि एक माह पहले झामुमो नेता अशोक मण्डल के नेतृत्व में टोला के लोग डीसी से मिल चुके हैं। डीसी ने तत्काल एग्यारकुण्ड सीओ को आदिवासियों को बसाने की दिशा में पहल करने का निर्देश दिया था।

दुधियापानी में छह सौ एकड़ जमीन है गैर आबाद

दुधियापानी मौजा में करीब छह सौ एकड़ जमीन गैर आबाद खाते की है। यहां फ्रेट कॉरिडोर के लिये इंडस्ट्रीयल हब बनने की बात थी। तत्कालीन डीसी के नेतृत्व में टीम ने सर्वे कर छह सौ एकड़ सरकारी जमीन होने की बात कही थी। पर कुछ तकनीकी कारणों से इंडस्ट्रीयल हब हस्तानांतरित हो गया। इसके बाद फर्जी कागजात से भू माफियाओं ने लगभग सारी जमीन अपने नाम कर ली। जहां कई कारखाना भी बन चुका है। उक्त जमीन पर आदिवासी टोला के अलावे रेलवे द्वारा विस्थापित शिवलीबाड़ी मध्य पंचायत के करीब ढाई सौ परिवारों को भी बसाया जा सकता है।

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