ग्रामीणों ने उठाए सवाल : निर्माण के बाद ज्यादा दिनों तक वाहन या बाढ़ का भार झेलने वाला नहीं
मोहनपुर/ भले ही मुख्यमंत्री झारखंड प्रदेश को भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश बनाने की बात करते हैं पर सच्चाई कुछ और है। इन दिनों चांदन नदी के रढ़िया घाट पर तेजी से उच्चस्तरीय पुल निर्माण कार्य में संवेदक द्वारा घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। इस मिलीभगत से भ्रष्टाचार अपने चरम पर है। जिसे जहां मौका मिल रहा, दोनों हाथ से लूट मची है। जहां पुल बनाने वाली कंपनी द्वारा जिम्मेदारों के सहयोग से जमकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। तभी तो पुल निर्माण में गुणवत्ता के सवाल पर ग्रामीणों द्वारा अंगुलियां उठाई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस तरह से संवेदक मानव का उल्लंघन कर रहे हैं। इससे यह साफ जाहिर होता है यह निर्माण के बाद ज्यादा दिनों तक वाहन व बाढ़ का भार झलने वाला नहीं है। विभाग के अधिकारी इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। पुल निर्माण से जुड़े लोगों का कहना है कि ठेका प्राप्त करने से लेकर पूरी निर्माण प्रक्रिया में हमेशा धांधली होती है। यह सच है कि निर्माण से संबंधित किसी भी विभाग में संगठित भ्रष्टाचार है और इसे सब जानते हैं। यहां किसी के आने जाने का कोई फर्क नहीं पड़ता सब कुछ सिस्टम से चलता बिल को भुगतान के लिए हर एक फाइल पर कितने चढ़ावा देना होगा, यह है तभी तो इंजीनियर के घरों में उनके वेतन से तो यह संभव नहीं हो सकता विभागीय अधिकारी चाहे वह इंजीनियर हो या दफ्तर का मुलाजिम सबका नजर आना चाहिए। विभागीय अफसर अपने फायदे के लिए इसे बढ़ावा देते हैं। बताते चलें कि विधायक नारायण दास ने उच्च स्तरीय पुल का शिलान्यास किया था।