वैद्यनाथ भारत का दूसरा तीर्थ है जहाँ होता है हरि-हर मिलन 

हरि-हर मिलन के बाद देवनगरी में जमकर उड़े गुलाल

देवघर में लोगों ने एक-दूसरे को रंग लगाकर खेली होली

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देवघर। वैसे तो हर पर्व को देवघरिया लोग बड़े ही अनोखे अंदाज में मनाते हैं। लेकिन होली पर्व का देवघर के लोगों के लिए एक खास मायने रखते हैं। वो इसलिए कि होली में ही देवघर में वैद्यनाथ जी विराजित हुए थे। इसलिए देवघर वासी अपने इष्ट अपने आराध्य को लेकर इसे बहुत ही खास तरीके से मनाते हैं। वैसे तो यहां रंगभरी एकादशी से ही होली की शुरुआत हो जाती है। लोग पलाश के फूल को सुखाकर रंग बनाना शुरू कर देते हैं। अगले दिन लोग धुर खेल खेलता है। कहा जाता है कि वैद्यनाथ की स्थापना के कारण जब भूत, पिशाच, राक्षस आदि शिवदूतों ने चिताभस्म की होली खेल खुशियां मनायी थी। कालांतर में यह धुरखेल के रूप में खेला जाने लगा। पूर्णिमा की शाम लोग फगडोल पर जा के हरि को झुलाते है और उन्हें गुलाल चढ़ाते हैं। फिर वहां से बाबा मंदिर जाकर बाबा को गुलाल अर्पित कर फिर होली की शुरुआत करते हैं। होली के शुभ अवसर पर रविवार को परंपरा के अनुसार हरि हर मिलन के साथ बाबा बैजनाथ का स्थापना दिवस मनाया लोगों ने बाबा पर गुलाल अर्पित करने के बाद एक दूसरे को गुलाल लगाते हुए होली की शुरुआत की। वही शाम 4:00 बजे मंदिर कार्यालय स्थित राधाकृष्ण मंदिर से भगवान हरि को डोली पर उठा कर आजाद चौक स्थित फगदोल पर ले जाया गया। फिर वहां से पूर्व तय समयानुसार अगले दिन अहले सुबह हरि को वहां से बाबा मंदिर लाया गया 
। बाबा मंदिर में सुबह पांच बजे हरिहर मिलन का कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस अद्भुत नजारे को देख अपना जीवन धन्य कर लेने के लिए हजारों की संख्या में लोगों की भीड़ मंदिर में जमा थी। गर्भगृह में कम जगह होने की वजह से बाहर लगी एल ई डी के माध्यम से लोगों ने इस अदभुत मिलन को देखा। वही गर्भगृह में इस मिलन के क्षण पर गूलाल चढ़ाने के बाद लोगों ने जमकर गुलाल उड़ाए। ज्ञात हो कि वैद्यनाथ भारत का दूसरा तीर्थ है जहाँ हरि-हर मिलन होता है। अगले दिन लोगों ने जमकर रंगों की होली खेली और एक दूसरे को बधाई दिये। 
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