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चांदी की कीमतों में आई भारी गिरावट ने निवेशकों और सर्राफा बाजार का ध्यान खींचा है। इस साल रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद चांदी का वायदा भाव गिरकर ₹2 लाख प्रति किलोग्राम के नीचे पहुंच गया। 26 अक्टूबर 2026 को कीमतों में कुछ सुधार भी देखने को मिला, लेकिन चांदी अब भी अपने रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे कारोबार कर रही है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि आखिर चांदी इतनी सस्ती क्यों हुई और आगे कीमतों का रुख कैसा रह सकता है?
रिकॉर्ड ऊंचाई से 54% के करीब टूटा भाव
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी के वायदा भाव ने 29 जनवरी 2026 को लगभग ₹4,20,048 प्रति किलोग्राम का रिकॉर्ड स्तर छुआ था। इसके बाद कीमतों में तेज गिरावट आई और 23 अक्टूबर को भाव लगभग ₹1,92,800 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया।
इन दोनों स्तरों की तुलना करें तो चांदी की कीमत में करीब 54% की गिरावट दर्ज की गई। 26 अक्टूबर की सुबह चांदी का वायदा भाव लगभग ₹1,96,350 प्रति किलोग्राम के आसपास कारोबार कर रहा था। इससे निचले स्तरों पर कुछ खरीदारी के संकेत मिले, हालांकि कीमतों में स्थायी सुधार की पुष्टि नहीं हुई थी।
ध्यान दें कि ये MCX वायदा बाजार के भाव हैं। स्थानीय सर्राफा बाजार में चांदी की कीमत टैक्स, शुद्धता, स्थानीय मांग और अन्य खर्चों के कारण अलग हो सकती है।
आखिर क्यों गिरी चांदी की कीमत?
चांदी की कीमतों में गिरावट के पीछे वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, निवेशकों की मुनाफावसूली और ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता जैसे कई कारण हो सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ने से अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर भी नजर रखी जा रही है। यदि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो निवेशकों के लिए ब्याज देने वाले विकल्प अधिक आकर्षक हो सकते हैं। चांदी से नियमित ब्याज नहीं मिलता, इसलिए ऐसे माहौल में इसकी निवेश मांग प्रभावित हो सकती है।
इसके अलावा, पहले कीमतों में आई तेज तेजी के बाद निवेशकों द्वारा मुनाफा वसूलना भी गिरावट को बढ़ा सकता है। हालांकि, कीमतों में आई पूरी गिरावट का कारण किसी एक कारक को नहीं माना जा सकता।
औद्योगिक मांग भी है अहम वजह
चांदी का इस्तेमाल केवल आभूषण और निवेश तक सीमित नहीं है। सौर ऊर्जा उपकरणों, इलेक्ट्रॉनिक्स और विभिन्न औद्योगिक उत्पादों में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
यदि वैश्विक आर्थिक गतिविधियों में कमजोरी आती है या औद्योगिक मांग को लेकर चिंता बढ़ती है, तो चांदी की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है। दूसरी ओर, सौर ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में मजबूत मांग लंबे समय में चांदी के बाजार को सहारा दे सकती है।
भारत में आयात लागत, रुपये और डॉलर की विनिमय दर तथा घरेलू उपलब्धता भी कीमतों को प्रभावित करती है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट का असर भारतीय बाजार में हमेशा समान अनुपात में दिखाई दे, यह जरूरी नहीं है।
क्या आगे और सस्ती होगी चांदी?
आने वाले दिनों में चांदी की कीमतों की दिशा कई कारकों पर निर्भर करेगी। इनमें अमेरिकी डॉलर की मजबूती, ब्याज दरों की उम्मीदें, वैश्विक आर्थिक स्थिति, औद्योगिक मांग और निवेशकों की खरीदारी शामिल हैं।
हालिया गिरावट के बाद कीमतों में कुछ सुधार जरूर देखा गया, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि चांदी अब निश्चित रूप से महंगी होने वाली है। इसी तरह, आगे और गिरावट आएगी, इसकी भी गारंटी नहीं है।
जो लोग चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, उन्हें खरीदारी से पहले अपने शहर का ताजा खुदरा भाव और चांदी की शुद्धता जरूर जांचनी चाहिए। निवेश के उद्देश्य से खरीदारी करने वालों को बाजार के उतार-चढ़ाव और अपने जोखिम को भी ध्यान में रखना चाहिए।
चांदी का MCX वायदा भाव रिकॉर्ड स्तर से करीब 54% गिरकर ₹2 लाख प्रति किलोग्राम के नीचे पहुंच गया। वैश्विक आर्थिक चिंताओं, मुनाफावसूली और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता ने कीमतों पर दबाव बढ़ाया है। हालांकि, आगे चांदी सस्ती होगी या महंगी, यह बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
नोट: यह लेख समाचार और सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है, निवेश की सलाह नहीं। दिए गए भाव संबंधित तारीखों के MCX वायदा भाव हैं, स्थानीय खुदरा कीमतें अलग हो सकती हैं।
