दुमका। सिदो कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय में विश्वविद्यालय मेंटल हेल्थ सेल एवं स्नातकोत्तर मनोविज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वाधान में स्नातकोत्तर मनोविज्ञान विभाग में समन्यवक सह विभागाध्यक्ष डॉ विनोद कुमार शर्मा की अध्यक्षता में विश्व हाइपरटेंशन दिवस मनाया गया। यह मेजर योर ब्लड प्रेशर एक्युरेटली, कंट्रोल इट एंड लिव लांगर थीम पर आधारित था जो वर्ष 2005 से मनाया जा रहा है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ विनोद कुमार शर्मा ने कहा कि हाइपरटेंशन एक मनोदैहिक बीमारी है। यह टाइप ए पर्सनेलिटी वाले लोगो को ज्यादा होता है। संवेगात्मक अभिव्यक्ति न होने से व्यक्ति में तनाव जमा होता है जो परिस्थितिवश विषम उद्दीपन के कारण व्यक्ति में उच्च रक्तचाप वृद्धि का कारण बनता है जो हार्ट अटैक, ब्रेन हैमरेज, किडनी फेल्योर, डिमेंशिया, आदि के रुप में परिणत होती है। यह साइलेंट किलर है जो जीवन के किसी भी मोड़ पर अचानक मौत का कारण बन सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 30 से 79 वर्ष के बीच आयु के करीब 1.28 अरब लोगों में उच्च रक्तचाप की शिकायत है। विडंबना कहे कि भारत में निदान में आए 37 प्रतिशत केस में केवल 30 प्रतिशत ही इलाज करा पाते है। दुनिया में हाई ब्लड प्रेशर अर्थात हाईपरटेंशन से प्रतिवर्ष 75 लाख लोग असामयिक मौत मरते है।
डॉ शर्मा ने यह भी कहा कि हाइपरटेंशन के उत्पत्ति में सतत तनाव, दोषपूर्ण जीवन शैली, संवेगात्मक अलगाव, विषम एवम असंतोषपूर्ण सामाजिक वातावरण, बाहरी भोजन, व्यायाम की कमी, आदि प्रमुख मनोसामाजिक कारक है तो वही इसके इसके रोकथाम के लोगों में जागरुकता, योग, रिलेक्सेशन प्रक्षिक्षण आदि सहित व्यक्ति कोपिंग एबिलिटी को मजबूत करने की जरूरत है जिससे आत्मविश्वास के साथ परिस्थिति पर नियंत्रण बनाए रख सके। मनोवैज्ञानिक परामर्श एवम मनोविश्लेषण चिकित्सा विधि के द्वारा अचेतन में दमित तनावों व विकारों को निकाल बाहर करने की जरूरत है। कार्यक्रम में पीजी सेम टू व फोर के विद्यार्थी उपस्थित थे। मंच संचालन पूजा कुमारी ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन मिथलेश हेंब्रम ने किया।
एसकेएमयू के पीजी मनोविज्ञान विभाग में मना हाइपरटेंशन डे
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