अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) द्वारा 15 सितंबर को रांची में आयोजित राज्यस्तरीय ‘छात्र गर्जना’ कार्यक्रम के बाद आज दुमका जिले में समाहरणालय परिसर में एक और ‘छात्र गर्जना’ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य झारखंड सरकार की विफलताओं को उजागर करना था। प्रदेश सहमंत्री शुभम की उपस्थिति में ABVP ने सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया।
कार्यक्रम में शुभम ने झारखंड के मौजूदा हालात पर तीखी आलोचना की। उन्होंने 2019 के विधानसभा चुनाव के दौरान हेमंत सोरेन सरकार द्वारा किए गए वादों, जैसे शिक्षा, रोजगार, और महिला सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित किया। उनका कहना था कि झारखंड की जनता ने सरकार को मौका दिया था, लेकिन राज्य आज भी गरीबी और कमजोर प्रशासन की चपेट में है। झारखंड, जो 40% खनिज संपदा से परिपूर्ण है, वहां 40% लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। शिशु कुपोषण और शिक्षा की दुर्दशा भी चिंता का विषय है।
शुभम ने राज्य में बढ़ते भ्रष्टाचार और घोटालों का भी जिक्र किया, विशेष रूप से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ लगे घोटाले के आरोपों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार के मंत्रियों और अधिकारियों ने राज्य को “लूट खंड” बना दिया है। लव जिहाद और लैंड जिहाद जैसे मुद्दे भी सामने लाए गए, जिनसे आदिवासी समाज की स्थिति और अधिक दयनीय हो गई है।
उन्होंने राज्य की शिक्षा व्यवस्था की भी आलोचना की, जिसमें विश्वविद्यालयों में कुलपति और कॉलेजों में प्रधानाचार्य की कमी के कारण छात्रों की शिक्षा पर गंभीर असर पड़ रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं की भी दयनीय स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था एक दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की तरह है, जिसे सरकार की मदद की सख्त जरूरत है।
कार्यक्रम में कई अन्य प्रमुख कार्यकर्ता भी उपस्थित थे, जिन्होंने राज्य की मौजूदा स्थिति पर अपने विचार व्यक्त किए। ABVP ने झारखंड सरकार को हर मोर्चे पर विफल बताते हुए एक ‘काला दस्तावेज’ जारी किया, जो राज्य की शैक्षणिक, सामाजिक, रोजगार, और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोलता है।
दुमका के छात्र गर्जना में शामिल प्रमुख कार्यकर्ता:
हिमांशु दुबे, मनोज सोरेन, अभिषेक गुप्ता, लखीराम मंडल, धनंजय कुमार, अमन कुमार, अभिषेक पाल, सोनाली टुडू, खुशी कुमारी, स्मृति रानी, और कई अन्य।
यह आयोजन ABVP की ओर से राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ एक मजबूत विरोध के रूप में देखा जा रहा है, जो झारखंड की मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक स्थिति को उजागर करता है।