उप-राष्ट्रपति ने कौशल विकास और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए एक समर्पित मंत्रालय के गठन की घोषणा की, जिसके तहत 60,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इस राशि का उपयोग अगले पांच वर्षों में 5 लाख युवाओं को इंटर्नशिप प्रदान करने के लिए किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि गांवों और अर्ध-शहरी क्षेत्रों को कौशल केंद्रों का हब बनाया जाना चाहिए, जिससे देश के युवा सशक्त बन सकें।
मेघालय के अपने अनुभव साझा करते हुए उप-राष्ट्रपति ने कहा, “अगर कहीं स्वर्ग है तो वह भारत में है, और अगर कोई स्वर्गीय आत्मा है तो वह मेघालय में है।” उन्होंने मेघालय की प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन क्षमता की सराहना की और कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था को पर्यटन के जरिए एक नई दिशा दी जा सकती है। साथ ही, उन्होंने मेघालय के प्रतिभाशाली मानव संसाधन का उपयोग कर राज्य को और उन्नति की ओर ले जाने का आह्वान किया।
इस मौके पर मेघालय के राज्यपाल श्री सी.एच. विजयशंकर, मुख्यमंत्री श्री कॉनराड के संगमा, कैबिनेट मंत्री डॉ. माजेल अम्परीन लिंडोह और मुख्य सचिव श्री डोनाल्ड फिलिप्स वाहलांग सहित अन्य प्रमुख हस्तियां भी मौजूद थीं।