दुमका:
तालझारी थाना क्षेत्र में नाबालिग के साथ एक साल तक शादी का झांसा देकर यौन शोषण करने और बाद में ग्रामीणों द्वारा आरोपी युवक से उसकी शादी करवा देने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 और पोक्सो एक्ट की धारा 4 के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।
हालांकि, आरोपी द्वारा पीड़िता के मांग में सिंदूर भरने की वायरल तस्वीर के बावजूद पुलिस ने अब तक बाल विवाह अधिनियम, 2006 और किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धाराएं नहीं जोड़ी हैं, ना ही बाल विवाह कराने वालों को आरोपी बनाया गया है।
पीड़िता को सीसीआई भेजा गया, CWC ने उठाया कड़ा कदम
अनुसंधानकर्ता एसआई पी. भगत ने 6 जून की रात पीड़िता को बरामद कर फार्म-42 के तहत दुमका के धधकिया स्थित बालिका गृह में रातभर के लिए रखा। अगले दिन महिला पुलिस की उपस्थिति में पीड़िता को फार्म-बी और प्राथमिकी की प्रति के साथ बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
CWC सदस्य डॉ. राजकुमार उपाध्याय ने बताया कि पीड़िता को न केवल यौन शोषण (पोक्सो) बल्कि बाल विवाह के मामले में भी “देखभाल और संरक्षण की जरूरतमंद बालिका” (CNCP) घोषित किया गया है।
पीड़िता का बयान: शादी का वादा कर कई बार किया दुष्कर्म
पीड़िता ने बताया कि वह आठवीं कक्षा की छात्रा है और चार भाई-बहनों में सबसे बड़ी है। उसके माता-पिता उत्तर प्रदेश के कानपुर में मजदूरी करते हैं। वह अपने नानी-नाना के घर रहती है। उसने बताया कि आरोपी युवक से उसका एक साल से प्रेम संबंध था, जिसने शादी का वादा कर दो से अधिक बार उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। बाद में जब युवक ने शादी से इनकार कर दिया, तो उसने थाने में लिखित शिकायत दी।
सपोर्ट पर्सन की नियुक्ति, परिजनों को समिति में बुलाया गया
CWC ने ग्राम ज्योति संस्था के मुकेश कुमार दुबे को पीड़िता का सपोर्ट पर्सन नियुक्त किया है। साथ ही पीड़िता के माता-पिता, नाना-नानी और मामा को समिति के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया गया है।
बाल विवाह में शामिल लोगों पर भी दर्ज हो अलग प्राथमिकी
समिति ने जरमुंडी बीडीओ सह बाल विवाह प्रतिषेध पदाधिकारी को पत्र जारी कर बाल विवाह में शामिल लड़का, दोनों पक्षों के रिश्तेदारों और ग्रामीणों को चिन्हित कर उनके खिलाफ बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम की धारा 9 व 10 और किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 के तहत अलग से मामला दर्ज करने का निर्देश दिया है।
काउंसलिंग और सामाजिक जांच रिपोर्ट का आदेश
पीड़िता को फिलहाल धधकिया स्थित बालिका गृह में रखा गया है। समिति ने जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी को पीड़िता की त्वरित सामाजिक जांच रिपोर्ट समर्पित करने का आदेश दिया है। साथ ही, पीड़िता की मानसिक स्थिति के आकलन और सहयोग के लिए दुमका के पुराने सदर अस्पताल स्थित मानसिक स्वास्थ्य केंद्र में मनोचिकित्सक डॉ. जुल्फिकार अली भुट्टो से काउंसलिंग कराने का निर्देश भी दिया गया है।