अंतरराष्ट्रीय वर्कशॉप: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग

संताल परगना कॉलेज, दुमका में “इंटरनेशनल वर्कशॉप ऑन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस & मशीन लर्निंग: द नेक्स्ट फ्रंटियर इन रिसर्च इवेंट” विषय पर चार दिवसीय वर्चुअल अंतरराष्ट्रीय वर्कशॉप का शुभारंभ किया गया। इस आयोजन की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य डॉ. खिरोधर प्रसाद यादव ने की।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती भूमिका पर जोर
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में डॉ. यादव ने शिक्षा, शोध, कृषि और उद्योग जैसे क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि AI का प्रभाव न केवल जीवन स्तर सुधारने में है, बल्कि यह रोजगार के नए अवसर भी प्रदान कर रहा है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि मानवीय संवेदनाओं और अनुभवों का विकल्प AI नहीं हो सकता।

मुख्य वक्ताओं के विचार
कार्यक्रम के दौरान प्रमुख वक्ताओं ने AI के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की:

  • डॉ. सुरजीत दत्ता (स्कूल ऑफ इन्फॉर्मेटिक्स एंड आईटी, टेमसेक पॉलिटेक्निक, सिंगापुर): उन्होंने AI के हर क्षेत्र में उपयोग पर प्रकाश डालते हुए इसके सीमित और नियंत्रित उपयोग की सलाह दी।
  • जस्टिंदर कौर (ज्योति विद्यापीठ विमेंस यूनिवर्सिटी, जयपुर): उन्होंने मशीन लर्निंग, डीप फेक, इमेज और स्पीच लर्निंग की व्याख्या करते हुए AI के लाभ और सीमाओं पर चर्चा की।
  • मनाली राज (ग्लोबल फाउंडेशन विलेज, नई दिल्ली): उन्होंने AI के विभिन्न उपयोगों और इसके सामाजिक प्रभाव पर अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम की विशिष्टताएं
कार्यक्रम का संचालन लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी पंजाब की डॉ. राज सिन्हा ने किया। उन्होंने AI को आज की आवश्यकता बताते हुए इसके व्यापक उपयोग के महत्व पर जोर दिया। 

र्कशॉप के कन्वेनर डॉ. विनोद कुमार शर्मा ने कहा कि AI तकनीकी और व्यवहारिक दुनिया का अहम हिस्सा बन चुका है, जो डेटा विश्लेषण, रोग निदान और भविष्यवाणी जैसे कार्यों में सहायक है।

सक्रिय सहभागिता और सहयोग
कार्यक्रम में शिक्षकों, शोधकर्ताओं, स्नातकोत्तर एवं स्नातक छात्रों ने सक्रिय भागीदारी की। मंच संचालन बिलीवर्स ग्रुप, पंजाब के सदस्यों ने किया। धन्यवाद ज्ञापन प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर डॉ. कुमार सौरव ने दिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. अनीता चक्रवर्ती, डॉ. रूपम कुमारी और अन्य शिक्षकों ने सराहनीय भूमिका निभाई।

निष्कर्ष

यह वर्कशॉप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग के भविष्य के संभावनाओं को समझने और उनके व्यावहारिक उपयोग को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुई।

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