दुमका के दर्जी मोहल्ला (वार्ड नंबर 17) और डंगाल पाड़ा में डिप्थीरिया का एक मामला सामने आने के बाद एक विशेष टीकाकरण अभियान चलाया गया। इसके तहत 0-7 साल तक के बच्चों और 10-16 साल के किशोर-किशोरियों को टीका लगाया गया, जिसमें कुल 48 बच्चों को कवर किया गया। यह अभियान इस जानलेवा बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए आयोजित किया गया था।
डिप्थीरिया क्या है?
डिप्थीरिया एक गंभीर जीवाणु संक्रमण है, जो कोरिनेबैक्टीरियम डिप्थीरिया नामक बैक्टीरिया से फैलता है। यह गले और नाक को प्रभावित करता है और खांसी, छींक या संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क से फैल सकता है। इसके लक्षणों में गले में खराश, बुखार, गले में सफेद परत और सांस लेने में तकलीफ शामिल हैं। अगर समय पर इलाज न किया जाए, तो यह दिल की समस्याएं या लकवा भी पैदा कर सकता है।
अचानक टीकाकरण अभियान क्यों शुरू किया गया?
यह मामला तब सामने आया जब डब्ल्यूएचओ के सर्विलांस मेडिकल ऑफिसर (एसएमओ) डॉ. ध्रुवा महाजन ने सिविल सर्जन दुमका और उपायुक्त को सूचित किया। इसके बाद स्वास्थ्य टीमों ने घर-घर जाकर निगरानी की और टीकाकरण से छूटे बच्चों की सूची तैयार की। इस सूची के आधार पर तुरंत टीकाकरण अभियान शुरू किया गया।
टीकाकरण अभियान कैसे और कब हुआ?
26 मई 2025 को सिविल सर्जन के निर्देश पर यह अभियान चलाया गया। जामा के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. परवेज आलम ने स्थानीय लोगों को टीकाकरण के लिए प्रेरित किया और इसकी अहमियत समझाई।
मौजूद स्वास्थ्यकर्मी व अधिकारी:
एएनएम नीलम कुमारी व मिनी मुर्मू
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व सहिया साथी
बीटीटी पद्मिनी सिंह व शिबू मिर्धा
अर्बन हेल्थ मैनेजर सुदामा शर्मा
डब्ल्यूएचओ टीम (डॉ. ध्रुवा महाजन, मॉनिटर रंजू कुमारी, असीम कुमार पाल आदि)
सावधानियां व सलाह:
स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से बच्चों का पूरा टीकाकरण (DTap/पंचवर्षीय टीका) सुनिश्चित करने और गले में सूजन, तेज बुखार या सांस लेने में दिक्कत होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की अपील की है।
डिप्थीरिया जानलेवा हो सकता है, लेकिन टीकाकरण से इससे बचा जा सकता है। अधिकारी इस क्षेत्र में और निगरानी जारी रखेंगे।