जरमुंडी के विराजपुर गांव में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन
बाल विवाह को लेकर ग्रामीणों को मिली कानूनी जानकारी
बासुकीनाथ। जिला विधिक सेवा प्राधिकार दुमका के निर्देशानुसार जरमुंडी प्रखंड अन्तर्गत विराजपुर गांव में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के बारे में विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष सह जिला सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार मिश्रा एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव विश्वनाथ भगत के आदेशानुसार बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत लोगों को कानूनी जानकारी दी गई। पीएलवी नवीन प्रसाद द्वारा ग्रामीणों को जानकारी दिया गया कि कम उम्र में बच्चों की शादी कर देने से उनके स्वास्थ्य, और मानसिक विकास के साथ साथ खुशहाल जीवन पर असर पड़ता है। कम उम्र में शादी करने से पूरे समाज में पिछड़ापन आ जाता है। इसलिए हमारे देश के कानून में लड़के और लड़की की शादी के लिए एक निश्चित उम्र तय की गई है। लड़की की शादी की उम्र अगर 18 साल से कम है या लड़के की उम्र 21 साल से कम है तो वह शादी बाल विवाह कहलायेगी। जो कि कानूनन अपराध है। लड़के अथवा लड़की के बालिग होने से पूर्व, कम उम्र में शादी करने की हमारे कानून में पूरी तरह से मनाही है। पीएलवी नवीन प्रसाद ने बताया कि जो कोई भी पंडित, मौलवी, माता-पिता, रिश्तेदारों, दोस्तों आदि द्वारा यदि बाल विवाह करवाता है, उसे दो साल तक के कठोर कारावास या एक लाख रुपये के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जा सकता है। पीएलवी ने बताया कि बालक व बालिका पूर्णतया नासमझ रहने से अपने विवाह संस्कार का विरोध भी नहीं कर पाते और बाल विवाह में अधिक दहेज भी नहीं देना पड़ता। इसी कारण यह कुप्रथा निम्न व मध्यम वर्ग में विशेष रूप से प्रचलित हुई। बाल विवाह ऐसी कुप्रथा है, जिससे वर- वधू का भविष्य अन्धकारमय बन जाता है। इससे समाज में कई विकृतियां आ जाती हैं। बाल विवाह ऐसी कुप्रथा है, जिससे वर वधू का भविष्य अन्धकारमय बन जाता है। इससे समाज में कई विकृतियां आ जाती है। इस मौके पर मनोहर बाउरी, अनीता देवी, खुशबू कुमारी, कंचन कुमारी, बबलू बाउरी, हरीराम बाउरी, निर्मला देवी, राजू देवी, वीणा देवी, प्यारी देवी, जिम्मी देवी, आरती देवी, रानी कुमारी, पुष्पा देवी, सुनीता देवी, सावित्री देवी, गौरंगी देवी, पूर्णी देवी, पानू सोरेन आदि मौजूद थे।
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