मधुपुर। थाना क्षेत्र के पटवाबाद बावन बीघा सपहा आंगनबाड़ी के समीप मस्जिद गली में यूएस ऐड, मोमेंटम और जपाईगो के साथ पब्लिक हेल्थ रिसोर्स सोसाइटी की तरफ से मोबिलाइजेशन एंड एडवोकेसी फॉर गर्ल चाइल्ड , के अन्तर्गत जेंडर के विषय पर महिलाओं व किशोरियों के साथ ट्रेनिंग आयोजन किया गया।
जेंडर के माध्यम से किशोरियों ने अपने परिवार के सदस्यों तथा समाज को यह संदेश देने का प्रयास किया की भी बेटों के समान अधिकार दो, बेटा बेटी एक समान है इन्हे अलग समझने की जरूरत नहीं है। पुरुष और महिलाओं को बराबर समझने की जरूरत है। वर्तमान दौर में बेटियों की घटती संख्या झारखंड के साथ-साथ गांव की चिंता करने की बात है हालंकि गांव में लड़कियों की संख्या अच्छी स्थिति में है परंतु फिर भी किशोरियों के हक और अधिकार को लेकर और उनकी सुरक्षा को लेकर जागरूकता की जरूरत है।बेटियां बेटे से कम नहीं है , जो बेटे कर सकते हैं वह बेटियां भी कर सकती हैं , यहां तक की बेटियां बेटे से अधिक कर सकती है। बावन बीघा सपहा गांव में आयोजन कर महिलाओं ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। गांव की महिलाओं ने बताया की हमारी बेटियां पढ़ेंगी , सुरक्षित माहौल में रहेंगी तभी हमारे परिवार के साथ साथ हमारे समाज और देश आगे बढ़ेंगा । गांव वालो के द्वारा भी अपनी ओर से राय रखा गया की बेटियां बेटे से भी अच्छे हैं यदि उसको सही रूप से जिस तरह से लड़कों को अवगत किए जाते हैं , लड़कियों को भी अवगत किया जाए तो वह आगे बढ़ बढ़ती हैं और बुढ़ापे का सहारा भी बन रही है। गांव की महिलाओं से बातचीत करने पर पता चला कि गांव में लड़कियों की स्थिति काफी अच्छी संख्या में है परंतु बेटियों की स्थिति तभी सुदृढ़ हो सकती है जब वह आर्थिक रूप से स्वावलंबी हो सके और अपने पैरों पर खड़ी हो सके और दहेज के लिए उनके पिता माता को उसी के सामने गिड़गिड़ाने की जरूरत ना पडे। गांव के पुरुष बच्चे कम उम्र में ही कमाने के लिए शहर को चले जाते है। मौके पर पीएचआरएस की टीम ने भी इस मामले को लेकर बताया की यूएसए मोमेंटम की तरफ से जपाईंगो के साथ बालिकाओं के लिए लामबंदी वकालत के कार्य को मधुपुर प्रखंड के 20 गांव में अंजाम दिया जा रहा है। भारत के साथ-साथ झारखंड और देवघर में गिरते लिंगानुपात को देखते हुए मधुपुर प्रखंड में एक रिसर्च की विषय वस्तु पर पीएचआरएस की टीम कार्य कर रही है जिसमें मोबिलाइजेशन एंड एडवोकेसी फॉर गर्ल चाइल्ड के मुहिम को रखते हुए उनसे संबंधित हर प्रकार के स्थिति परिस्थितियों का आकलन किया जा रहा है। गांव में लड़कियों के अधिकार, स्वास्थ्य सेवाएं ,मिलने वाले अवसर, भविष्य की संभावनाएं के साथ-साथ उनकी शिक्षा और मौलिक अधिकारों पर आकलन किया जा रहा है। सरकार के विभिन्न में कार्यक्रमों की जागरूकता के साथ-साथ उन कार्यक्रमों से मिलने वाली सुविधाओं का भी आकलन किया जा रहा है मौके पर रिशिता मैशी, इशरत परवीन, मृत्युंजय कुमार पीयूष झा, नहजाना परवीन, फरत यासमीन, शाहिना सबा, रेशमा बीबी, तबस्सुम खातून, अंजुम आरा, देवंती देवी, नर्मनिया देवी, रेखा देवी, कुसमी देवी, फरिदा, सहजादी समेत दर्जनों महिलाएं उपस्थित थे!
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