शिक्षकों के अभाव में पढ़ाई पर असर

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हनवारा। शिक्षा के मामलें में महागामा प्रखंड क्षेत्र के अधिकांश सरकारी स्कूलों का हाल खस्ताहाल है। एक ओर प्रशासन और सरकार तो गुणात्मक सुधार शिक्षा की बात तो करती है लेकिन दूसरी ओर शिक्षकों कमी पर ध्यान नहीं दे रही हैं। ऐसे में परिजनों को अपने बच्चों की भविष्य की चिंता तो सता ही रही हैं साथ ही सरकारी स्कूलों की व्यवस्था पर भी बड़ी सवाल भी खड़ी हो रही हैं। इसका ताजा उदाहरण महागामा प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय बर्दभड़ा,प्राथमिक विद्यालय कोयला गंगटा आदि स्कूलों में देखा जा सकता है। बर्दभड़ा स्कूल में 111 छात्र-छात्रा में महज एक ही सहायक शिक्षक अब्दुल कय्यूम हैं।वहीं कोयला गंगटा स्कूल में 261 विद्यार्थियों में महज एक सरकारी शिक्षक एवं एक सहायक शिक्षक की तैनाती है। प्रखंड क्षेत्र में ऐसे कई स्कूल हैं जहां शिक्षकों की भारी कमी है और इसका असर पढ़ने वाले बच्चों के ऊपर पड़ रही हैं। जबकि शिक्षा अधिकार अधिनियम के तहत 30 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक होना लाजमी है। साथ ही जिस स्कूल में एक ही शिक्षक है प्रधानाध्यापक का जिम्मेदारी भी उसी शिक्षक पर है। प्रखंड व जिला की बैठक हो या प्रशिक्षण उसमें भी उन्हें शामिल होना पड़ता है। जिस कारण शिक्षक न होने की वजह से इन विद्यालय में बच्चे की पढ़ाई भगवान भरोसे होती है। माने तो शिक्षक के कमी के कारण शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत विद्यार्थियों को शिक्षा नहीं दी जा रही हैं। दरअसल दुर्गम विद्यालयों में जहां अध्यापक की भारी कमी देखने को मिलता है वहीं, सुगम क्षेत्रों में जरूरत से अधिक अध्यापक की तैनाती रहती है। कही जाय तो सरकार द्वारा तय मानकों की खुली अनदेखी और नौनिहालों के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है।

महागामा प्रखंड क्षेत्र में 201 स्कूल जिसमें अधिकांश स्कूलों में शिक्षकों की है भारी कमी
महागामा प्रखंड क्षेत्र में उत्क्रमित उच्च विद्यालय और प्लस टू विद्यालय मिलाकर लगभग 201 हैं। 201 स्कूलों में से अधिकांश स्कूलों में शिक्षक की भारी कमी है। जिसमें 177 ऐसे विद्यालय हैं जिसमें मध्याह्न भोजन संचालित है।साथ ही सरकार के द्वारा अनुदानित 34 मदरसा भी है।

प्रखंड में समतामूलक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मार्ग में शिक्षकों का अभाव बना बाधक

पिछले दिनों सरकार के द्वारा शिक्षकों की युक्तिकरण के फलस्वरूप भी विद्यालयों में समानुपातिक ढंग से शिक्षकों की नियुक्ति नहीं किया गया।जिस कारण शिक्षा के बिना बच्चों का भविष्य अंधकार की ओर जा रहा है।

क्या कहते हैं प्रभारी प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी:
प्रखंड के स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है। सरकार शिक्षकों की नियुक्ति करेगी तब ही शिक्षकों की कमी दूर हो सकती हैं।
भोला प्रसाद साह
प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी
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