चिलगो गांव के ग्रामीणों के पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन के लिए जन सुनवाई कार्यक्रम आयोजित हुआ

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पाकुड़। अमड़ापाड़ा अंचल स्थित चिलगो गांव के ग्रामीणों के पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन के लिए जन सुनवाई कार्यक्रम आयोजित किया गया। पचुवाड़ा नॉर्थ कोल ब्लॉक के आवंटी पश्चिम बंगाल पावर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (डब्ल्यूबीपीडीसीएल) तथा जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित जन सुनवाई कार्यक्रम में अपर समाहर्ता मंजू रानी स्वांसी, जिला परिवहन पदाधिकारी सह भू-अर्जन पदाधिकारी संतोष कुमार गर्ग, अमड़ापाड़ा बीडीओ सह सीओ कुमार देवेश द्विवेदी, थाना प्रभारी सह इंस्पेक्टर गोपाल कृष्ण यादव, अमड़ापाड़ा प्रखंड प्रमुख जूही प्रिया मरांडी, आलूबेड़ा की मुखिया सरिता मरांडी, डब्ल्यूबीपीडीसीएल के जीएम रामाशीष चटर्जी, टीएस मांझी, नरेंद्र सिंह, एमडीओ बीजीआर के वाइस प्रेसिडेंट अनिल रेड्डी, पीएम शिवचंद्रा, विजय कुमार रेड्डी समेत अन्य अधिकारी व कर्मचारी के अलावे सैकड़ों की संख्या में स्थानीय ग्रामीण मौजूद थे।

जनसुनवाई में चिलगो गांव के ग्रामीणों को बीजीआर कोल कंपनी के अधिकारी के द्वारा बताया गया*
इस जनसुनवाई में चिलगो गांव के ग्रामीणों को बीजीआर कोल कंपनी के अधिकारी के द्वारा बताया गया है कि इस गांव में 124 परिवार विस्थापित किया गया है, जिसमें 473 सदस्य मौजूद हैं इसे आरएनआर कॉलोनी के तहत बनाकर उन्हें शिफ्ट कराया जाएगा। कंपनी के अधिकारियों ने कहा कि 124 परिवार में से 18 वर्ष के 179 युवकों को आरएनआर के तहत नौकरी का पैकेज दिया जाएगा। वही जनसुनवाई में बिटिया हेम्ब्रम, परगना मुर्मू, राम मुर्मू, जेठा मुर्मू तालामई। मुर्मू सहित कई लोगों ने अपनी अपनी समस्या कंपनी और प्रशासन के समक्ष रखा। इस जन सुनवाई कार्यक्रम में मौजूद अधिकतर ग्रामीणों ने पुनर्वास नीति का समर्थन किया है। साथ ही इस मौके पर मौजूद कई ग्रामीणों ने अपनी मांगों को दुहराया है। ग्रामीण परगना टुडू ने कहा कि उन्हें अभी तक जमीन का मुआवजा नहीं मिला है। जेठा मुर्मू ने कहा कि उन्हें नौकरी मिली है लेकिन, 12 हजार में उनका गुजरा नहीं हो रहा है। तलामय मुर्मू ने कहा कि उनके पिता और भाई नहीं हैं। वे केवल चार बहनें ही हैं लेकिन, अन्यत्र शादी होने के कारण उन्हें सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। ऐसे अन्य ग्रामीणों ने भी अपनी-अपनी समस्याओं को प्रशासन व कंपनी के अधिकारियों के समक्ष रखा।
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