किसान आधुनिक पद्धति से खेती कर अधिक उत्पादन प्राप्त करें
जरमुंडी प्रखंड के चोरडीहा गांव में जिला स्तरीय कृषक गोष्ठी का आयोजन
बासुकीनाथ। जरमुंडी प्रखंड के बरमसिया पंचायत के चोरडीहा गांव में शनिवार को जिला स्तरीय एक दिवसीय कृषक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कृषक गोष्ठी में आत्मा के परियोजना निदेशक देवेश कुमार सिंह मुख्य रूप से उपस्थित थे। जेआरएस के वैज्ञानिक डाक्टर शैलेंद्र मोहन ने कहा कि वर्मी कंपोस्ट दो से तीन माह में तैयार हो जाता है। वर्मी कंपोस्ट बनाने के लिए गड्ढा खोदकर उसमें गोबर डाल देना है, तीन लेयर तैयार करके उसमें केंचुआ डाल देना है एवं पानी देते रहें। भूमि की गुणवत्ता को लेकर डोलोमाइट का प्रयोग करना चाहिए। इससे जो फसल मिलता है वह काफी पौष्टिक होता है। मिट्टी में बोरोन की कमी होने से फल गिर जाता है, फल फट जाता है। वैसे खेत में 10 किलो प्रति हेक्टेयर बोरोन दिया जाता है। परियोजना निदेशक देवेश प्रसाद सिंह ने किसानों को बताया कि फसल का नुकसान दो तरह का होता है। पहला बीमारी और दूसरा कीड़ा लगने से। पौधों पर कई तरह की बीमारी लगती है। फसल में जड़ सड़न रोग विषाणु जीवाणु से होता है।जड़ को उखाड़ने पर वह सुखा मिलेगा और उसमें फफूंद का प्रकोप हो जाता है। अगर जड़ दुर्गंध वाला हो तो फसल में विषाणु का प्रकोप होता है। स्ट्रेप्टोसाइक्लिन एवं वेवेस्टीन मिलाकर पौधे के जड़ में छिड़काव करना चाहिए। स्ट्रेप्टोसाइक्लिन से बीज को भी उपचारित करने से जीवाणु का प्रभाव कम हो जाता है। पौधे के पत्ते में रोग लगने पर डायर्थन एम-45, 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। रिडोमिल एक ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर आलू के झुलसा रोग में प्रयोग करने से बहुत फायदा होता है। विषाणु रोग, मिर्च, टमाटर, पपीता आदि पौधे पर अधिक लगता है। बताया कि जिस पौधे में झुलसा रोग लगा है उसे निकाल कर जला देना चाहिए। म्यूनोलफॉस या मोनोक्रोटोफॉस एक ग्राम प्रति लीटर पानी में डालकर खेत में छिड़काव करना चाहिए। अधिकतर फसल में पिल्लू का प्रकोप होता है, वैसे ही स्थिति में क्विनोलोंस या मोनोक्रोटोफॉस एक से डेढ़ लीटर पानी में डालकर छिड़काव करने से पिल्लू मर जाता है। बीटीएम समरेंद्र सिन्हा ने कहा कि समेकित खेती करने से किसानों की आर्थिक स्थिति बदल सकता है। अंग्रेति सब्जी की खेती फल की खेती सभी को करना चाहिए। इस मौके पर एटीएम नंदलाल मंडल, कृषक मित्र दिनेश यादव, गोपाल यादव, अशोक यादव, कृषक लोकनाथ यादव, निरंजन दास, अधीन दास, महेंद्र दास सहित अन्य ने भाग लिया।
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