बाबूलाल मरांडी को झारखण्ड प्रदेश अध्यक्ष बनाकर भाजपा ने एक तीर से कई निशाना साधने की सकारात्मक कोशिश की

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बोकारो  I भारतीय जनता पार्टी ने मिशन 2024 को लेकर हैट्रिक जीत की तैयारी के लिए अपने फार्मूले के अनुरूप धरातल पर कार्य शुरू कर दिया है। एक और जहां संगठनात्मक कार्यक्रमों के जरिए कार्यकर्ता को सक्रिय किया जा रहा है तो दूसरी और जनता से भाजपा नेता सीधे संवाद कर रहे हैं। संगठनात्मक पदाधिकारियों में भी फेरबदल करते हुए लक्ष्य की पूर्ति को ध्यान में रखकर काबिल लोगों को दायित्व सौंपा जा रहा है। मंगलवार को भाजपा शीर्ष नेतृत्व द्वारा झारखंड प्रदेश अध्यक्ष के रुप में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी को नियुक्त किया गया। बाबूलाल मरांडी झारखंड के एक बहुत ही सुलझे हुए शांत, इंतजार करने वाले और मजे हुए लोकप्रिय राजनेता हैं। उनमें झारखंड के लिए कुछ बेहतर कर गुजरने की अपार क्षमता विद्यमान है। बाबूलाल मरांडी झारखंड के सर्वमान्य चेहरा है और ना सिर्फ आदिवासी बल्कि अन्य समुदाय के लोगों के बीच में बेहद लोकप्रिय हैं। बाबूलाल मरांडी का जन्म 11 जनवरी 1958 को झारखंड के गिरिडीह जिलांतर्गत तिसरी प्रखंड के सुदूरवर्ती गांव कोदाईबांक में हुआ। 1982-83 तक इन्होंने गिरिडीह जिले के देवरी प्रखंड स्थित महतोधरान प्राथमिक विद्यालय में बतौर शिक्षक कार्य किए। बाबूलाल मरांडी विद्यार्थी जीवन में में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े और संघ के तृतीय वर्ष प्रशिक्षित स्वयंसेवक हैं। साल 1984 में विश्व हिंदू परिषद में पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने कार्य प्रारंभ किया। साल 1989 में शिला पूजन के लिए संथाल परगना के प्रमुख बनाए गए। 1990 में भाजपा संथाल परगना के संगठन मंत्री बने। 1994 में संयुक्त बिहार प्रदेश के मंत्री एवं वनांचल प्रदेश के अध्यक्ष बने। 1998 में बाबूलाल मरांडी ने शिबू सोरेन को हराकर नासिर पुर का रिकॉर्ड तोड़ा बल्कि पहली बार लोकसभा पहुंचे एवं श्रद्धा अटल बिहारी बाजपेई के सरकार में वन एवं पर्यावरण मंत्री के दायित्व का निर्वहन इन्होंने किया। 1999 में रूपी सोरेन को हराकर दोबारा लोकसभा पहुंचे एवं फिर श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेई के सरकार में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री के दायित्व को इन्होंने संभाला। साल 2000 में भाजपा नेता के रूप में झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री बनने का भी गौरव बाबूलाल मरांडी ने प्राप्त किया। 2001 में रामगढ़ विधानसभा के विधायक बने और बतौर झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री  के रूप में इनका कार्यकाल झारखंड के लिए सबसे स्वर्णिम काल माना जाता है। राज्य के सर्वांगीण विकास की नीव बाबूलाल मरांडी ने रखी। सड़कों के क्षेत्र में इन्होंने जो कार्य किया उस पर आज भी ग्रामीण क्षेत्र की जनता दौड़ रही है। झारखंड में मॉडल सड़क निर्माण की शुरुआत करके इन्होंने इतिहास रचा। 2004 – 2014 तक बाबूलाल मरांडी कोडरमा लोकसभा के सदस्य रहे। वर्तमान में बाबूलाल मरांडी राजधनवार विधानसभा के विधायक हैं तथा भाजपा विधायक दल के नेता हैं। 2000- 2003 तक झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल संभालने के बाद साल 2003 में दल के आंतरिक विरोध के कारण मुख्यमंत्री का पद इन्हें त्यागना पड़ा। साल 2006 में बाबूलाल मरांडी ने झारखंड विकास मोर्चा नामक नए राजनीतिक दल का गठन किया और पूरे झारखंड में इसका शानदार विस्तार किया। साल 2019 में जेवीएम से राजधनवार विधानसभा से बड़ी जीत हासिल करने के बाद समय की मांग और उनके शुभचिंतकों की लगातार बढ़ते दबाव के बाद उन्होंने जेवीएम को भाजपा में विलय कर दिया और फिर से भाजपा का दामन थाम लिया। भाजपा सिर्फ नेतृत्व ने झारखंड में बड़ा संगठनात्मक बदलाव करते हुए राज्य के विकास के लिए विजन रखने वाले सबसे बड़े चेहरे को राज्य के संगठन का दायित्व देकर एक तीर से कई निशाना साधने का सकारात्मक कोशिश किया है। झारखंड में वर्तमान में 28 आदिवासी सुरक्षित विधानसभा सीटें हैं और इनमें से 26 सीट पर वर्तमान में गठबंधन सरकार का कब्जा है। इन्हीं सीटों के कारण पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को सत्ता से बेदखल होना पड़ा था। बाबूलाल मरांडी जैसे सुलझे हुए आदिवासी चेहरा को सामने रखकर भाजपा इन सीटों पर अपनी मजबूत स्थिति बनाने में कामयाब हो सकती है। झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों कि गठबंधन की सरकार की करतूतें, भ्रष्टाचार में संलिप्तता के मामले और आदिवासी- मूलवासियों के खिलाफ़ चल रहें हवा को बाबूलाल मरांडी जैसे तेजतर्रार नेता और हवा देने का काम करेंगे। बाबूलाल मरांडी झारखंड के हर एक क्षेत्र को अच्छे से जानते हैं, हर प्रखंड में इनसे जुड़े हुए लोग रहते हैं, झारखंड की भाषा और कला संस्कृति से भली-भांति अवगत है। भाजपा के इन के पुराने साथियों के साथ नए कार्यकर्ताओं में इनकी पकड़ तो है ही साथ ही इनके एक अपना टीम जो जेवीएम के रूप में था उनका भी इसबार इन्हें विशेष समर्थन प्राप्त होने वाला है। कुल मिलाकर भाजपा अपने लोकसभा और विधानसभा के लक्ष्य को झारखंड में साधने के लिए बाबूलाल मरांडी जैसे चेहरे के साथ सकारात्मक रूप से आगे बढ़ती दिख रही है। अगर आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा झारखंड के सभी 14 सीटों पर अच्छा प्रदर्शन करती है तो विधानसभा चुनाव में इनके पाक- साफ चेहरे के साथ झारखंड की जनता जाना पसंद कर सकती है और ऐसा हुआ तो एक बार फिर झारखंड की सत्ता बीजेपी के झोली में होगी। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी को बनाए जाने के बाद भाजपा संगठन में एक नई उर्जा का संचार हुआ है। बाबूलाल मरांडी भी एक नए उमंग और ऊर्जा से लबरेज़ होकर संगठन के मजबूती और भाजपा के लोकसभा और विधानसभा चुनाव को लेकर पूरी सक्रियता से काम करेंगे ।

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