मधेपुरा। बिहार सरकार ने राज्य के छ: विश्वविद्यालयों में मुख्यमंत्री व्यावसायिक पाठ्यक्रम मार्गदर्शन एवं उत्प्रेरण केंद्र की स्वीकृति प्रदान की है। इनमें भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा के अलावा पटना विश्वविद्यालय, पटना, पाटलीपुत्र विश्वविद्यालय, पटना, तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा एवं भीमराव अम्बेडकर
बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर के नाम शामिल हैं।
कुलपति ने जताई प्रसन्नता
कुलपति प्रो. आर. के. पी. रमण ने बीएनएमयू में इस केंद्र की स्वीकृति मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की है और इसके लिए बिहार सरकार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव, उर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, शिक्षा मंत्री प्रो. चंद्रशेखर और पिछड़ा एवं अतिपिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री अनीता देवी के प्रति आभार व्यक्त किया है।
प्रतिभाओं को मिलेगा अवसर
कुलपति ने बताया कि यह केंद्र बिहार राज्य पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (बिहार स्टेट बैकवर्ड क्लासेज फाइनेंस एंड डेवलपमेंट काॅरपोरेशन) के अंतर्गत संचालित है। इसकी शुरुआत उच्च शैक्षणिक संस्थानों में शैक्षणिक पदों पर नियुक्ति में पिछड़ा वर्ग एवं अत्यंत पिछड़ा वर्ग की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से की गई है। इसके तहत संबंधित प्रतियोगिता परीक्षाएं यथा- एनईटी, जेआरएफ, जीएटीई, पीएटी, पीएचडी आदि की परीक्षा पूर्व निःशुल्क प्रशिक्षण
(कोचिंग) दी जाएगी। इससे इस क्षेत्र की प्रतिभाओं को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आगे आने का अवसर मिलेगा।
28 फरवरी, 2023 तक आवेदन आमंत्रित
कुलसचिव डॉ. मिहिर कुमार ठाकुर ने बताया कि केंद्र में नामांकन हेतु 28 फरवरी, 2023 तक आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।आवेदन केंद्र या उप कुलसचिव स्थापना कार्यालय से नि: शुल्क प्राप्त किया जा सकता है अथवा निगम की वेबसाइट से डाउनलोड भी किया जा सकता है।
कुल 60 सीटों पर होगा नामांकन
उप कुलसचिव (स्थापना) डॉ. सुधांशु शेखर ने बताया कि केन्द्र में कुल 60 छात्र -छात्राओं का एक बैच (प्रशिक्षण अवधि 06 माह) संचालित कराया जाएगा। इसमें प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए कुल उपलब्ध सीटों (60) में से 40 प्रतिशत (24) पिछड़ा वर्ग तथा 60 प्रतिशत (36) अति पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं के लिए अनुमान्य होगा। अति पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं की अनुपलब्धता की स्थिति में पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं को एवं पिछड़ा वर्ग के
छात्र-छात्राओं की अनुपलब्धता की स्थिति में अति पिछड़ा वर्ग के छात्र- छात्राओं का नामांकन किया
जाएगा। दोनों कोटियों में छात्राओं के लिए 33 प्रतिशत छैतिज आरक्षण अनुमान्य है।
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