राष्ट्रीय जीवन गौरव से सम्मानित किए गए झारखंड के शिक्षक डॉ सपन कुमार

गया। गौतम बुद्ध की ज्ञान स्थली बोधगया में झारखंड के शिक्षक डॉ सपन कुमार को राष्ट्रीय जीवन गौरव पुरस्कार से सम्मानित किया गया। हमेशा ही अपने नवाचारों से देश के साथ अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाले डॉ कुमार ने एक बार फिर दुमका सहित झारखंड राज्य को गौरवान्वित किया है। राष्ट्रीय नवाचार शैक्षणिक संगोष्ठी का आयोजन ज्ञान एवं मोक्ष की धरती बिहार के बोधगया में किया गया। जिसमें आईआईटी पटना के डायरेक्टर डॉ टी एन सिंह, काशी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रमेश कुमार, केंद्रीय विश्वविद्यालय गया के प्रोफेसर कुणाल किशोर, प्रो आभा सिंह, प्रो रेखा अग्रवाल सहित देशभर से आए कई शिक्षाविद मौजूद थे । 

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कार्यक्रम का आयोजन महाराष्ट्र की संस्था बाल रक्षक प्रतिष्ठान द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर किया गया। राष्ट्रीय नवाचार शैक्षणिक संगोष्ठी में अपने विचारों को व्यक्त करते हुए डॉ सपन कुमार ने सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में स्थित विद्यालयों की चुनौतियों एवं इसके हल के बारे में विस्तार से अपनी बातों को रखा। उन्होंने कहा कि सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों में शहरी क्षेत्र के विद्यालयों के बनिस्बत शिक्षा देना काफी चुनौतीपूर्ण कार्य है एक और जहां विद्यालय में शहरी क्षेत्र की अपेक्षा मूलभूत सुविधाओं की घोर कमी रहती है साथ ही अति पिछड़े, आदिवासी ,दलित परिवार से आने वाले  ऐसे बच्चों के साथ सामाजिक ,आर्थिक चुनौतियों के साथ विद्यालय में ड्रॉप आउट की समस्या, अभिभावकों का अशिक्षित होना मूलभूत  समस्याएं हैं । 

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संगोष्ठी में शिक्षण व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की गई। देश भर में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले नवाचारी शिक्षकों को सम्मानित किया गया ।जिसमें झारखंड राज्य के एकमात्र शिक्षक डॉ सपन कुमार को सम्मानित किया गया। उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट नवाचारी शैक्षणिक गतिविधियां ,बालिका शिक्षा, नैतिक शिक्षा, अनुशासन ,सामाजिक समरसता ,भाईचारा की भावना जागृत करने,स्वच्छता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए  यह सम्मान दिया गया ।

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