जामताड़ा। झारखंड में अवस्थित प्रसिद्ध पारसनाथ पहाड़ को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। आदिवासी समुदाय पारसनाथ पहाड़ को मारांग बुरू अर्थात भगवान मानते हैं। पारसनाथ पहाड़ को लेकर आदिवासी सेगेंल अभियान भी अब लड़ाई के मूड में है। आदिवासी सेंगेंल अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह पूर्व सांसद सालखन मुर्मू ने जामताड़ा में प्रेस वार्ता कर कहा कर आर पार की लड़ाई की घोषणा की। उन्होंने कहा कि पारसनाथ पहाड़ पर पहला हक आदिवासियों का है। उन्होंने कहा कि पारसनाथ पहाड़ हम लोगों का मारांगबुरू है। जिसकी रक्षा आदिवासी अस्तित्व पहचान और हिस्सेदारी की रक्षा है । सालखन मुर्मू ने आरोप लगाया कि झारखंड सरकार आदिवासियों को धोखे में रखकर पारसनाथ पहाड़ को जैन धर्म के हाथों सौंपने का काम किया है। उन्होंने कहा कि पारसनाथ मारांग बुरू बचाओ यात्रा हम लोगों द्वारा चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग द्वारा भी आदिवासियों के पक्ष को बिना सुने समझे ही पारसनाथ पहाड़ को केवल जैन धर्मावलंबियों के तीर्थ स्थल के रूप में घोषित किया गया है। जिसका हम लोग कड़ा विरोध करते हैं ।उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड ऑफ राइट्स में साथ ही जैन बनाम संथाल आदिवासी फैसला में पारसनाथ पहाड़ आदिवासी के पक्ष में ही है। बावजूद भारत सरकार और राज्य सरकार द्वारा इस पहाड़ को आदिवासियों से दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि 30 जनवरी तक पारसनाथ पहाड़ और सरना धर्म कोड मामले में भारत सरकार कोई सकारात्मक पहल नहीं करती है तो अगले माह फरवरी 2023 में आदिवासी सेगेंल अभियान द्वारा पांच राज्यों में अनिश्चितकालीन रोड रेल चक्का जाम किया जाएगा।
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