झारखंड राज्य अनुसचिवीय कर्मचारी संघ की हड़ताल का नवां दिन

Karmchari_Dumka

दुमका: झारखंड राज्य अनुसचिवीय कर्मचारी संघ (समाहरणालय संवर्ग) की नौ सूत्री मांगों को लेकर सोमवार को भी अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रही। यह हड़ताल अब नवें दिन में प्रवेश कर चुकी है, जिससे समाहरणालय स्थित विभिन्न कार्यालयों जैसे जिला सामान्य शाखा, जिला विधि शाखा, जिला राजस्व शाखा, जिला भू-अर्जन कार्यालय, साहाय्य शाखा, जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग, जिला स्थापना शाखा, जिला विकास शाखा, जिला योजना शाखा, जिला आपूर्ति कार्यालय, जिला पंचायत राज कार्यालय, जिला अभिलेखागार, जिला निर्वाचन कार्यालय, एल.आर.डी.सी. का कार्यालय, अनुमंडल कार्यालय और सभी प्रखंड एवं अंचल कार्यालयों में कामकाज पूरी तरह से ठप हो गया है।

हड़ताल को विभिन्न विभागीय संगठनों और क्षेत्रीय राजनीतिक प्रतिनिधियों का भी समर्थन मिल रहा है। जिला मंत्री श्री ललन चौबे ने बताया कि सम्मानजनक मांगों की पूर्ति के लिए कोई फोरम नहीं बनाया गया है। 2014 में उच्च स्तरीय कमिटी की अनुशंसा के दस साल बाद भी इसे लागू नहीं किया जा सका है। समाहरणालय संवर्ग के कर्मचारियों ने अपनी मांगों को चरणबद्ध तरीके से सरकार के सामने रखा, लेकिन सरकार के नकारात्मक रवैये के कारण वे हड़ताल पर जाने के लिए मजबूर हो गए हैं।

श्री चौबे ने बताया, “संवैधानिक तरीके से हड़ताल करना हमारी विवशता है। सरकार को अपने अधीनस्थ सरकारी सेवकों के भविष्य की चिंता नहीं है। इस हड़ताल पर जाने के लिए सरकार ने हमें बाध्य किया है, जिससे आम लोगों का विभिन्न कार्यालयों में काम पूरी तरह बाधित हो गया है। लोग जाति, निवासी, आय प्रमाण पत्र, न्यायालय कार्य और विधि-व्यवस्था जैसे सरकारी कार्यों के लिए प्रखंड और अंचल से लेकर जिला मुख्यालय के विभिन्न कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं और परेशान हो रहे हैं। इसके लिए सरकार को तुरंत संज्ञान लेना चाहिए।”

धरना स्थल पर कई कर्मचारी नेताओं ने अपने विचार व्यक्त किए और आह्वान किया कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं हो जाती हैं, वे चट्टानी एकता के साथ हड़ताल पर डटे रहेंगे। धरना स्थल पर उपस्थित प्रमुख कर्मचारियों में कैरोलिना मुर्मू, बाबुराम टुडू, अजीत बास्की, प्रमीता सोरेन, आनंद कुमार हांसदा, अरुण कुमार शर्मा, ब्रजेश कुमार, जया भारती, पुतुल शर्मा, गणेश्वर देहरी, विश्वजीत दत्ता, चून्न हेम्ब्रम, मंयक भारद्वाज, संदीप कुमार, दीपक बास्की, संतोष देहरी, विकास कुमार, ईषा कुमारी गुप्ता और अजित कुमार शामिल थे।

झारखंड सरकार को इस हड़ताल से उत्पन्न हो रही समस्याओं का जल्द से जल्द समाधान करना चाहिए ताकि सामान्य जनजीवन फिर से पटरी पर आ सके।

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