
जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) दुमका के तत्वावधान में मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन न्याय सदन में किया गया। कार्यशाला का उद्घाटन जिला जज द्वितीय प्रकाश झा, जिला जज तृतीय राजेश सिन्हा, और डालसा सचिव उत्तम सागर राणा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस कार्यक्रम में व्यवहार न्यायालय दुमका के सभी न्यायिक दंडाधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यशाला में मोटर दुर्घटना से पीड़ित परिवारों को समय पर उचित मुआवजा दिलाने के प्रावधानों और प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर विस्तृत चर्चा की गई। इस मौके पर जिला जज प्रकाश झा ने मोटर दुर्घटना कानूनों में वर्ष 2022 में हुए बदलावों पर जोर देते हुए बताया कि सड़क दुर्घटना के बाद पुलिस को 30 दिनों के भीतर संबंधित दस्तावेज न्यायालय में प्रस्तुत करना आवश्यक है। ऐसा न करने पर अदालत को इसकी सूचना देनी होगी। उन्होंने थाना प्रभारियों से अपेक्षा जताई कि वे अपने कर्तव्यों का पालन बेहतर तरीके से करें और पुराने अधिकारियों से बेहतर प्रदर्शन करें।
प्रकाश झा ने यह भी स्पष्ट किया कि दुर्घटनाग्रस्त वाहनों के दस्तावेजों की डीटीओ से जांच करवाना अनिवार्य है। पुलिस अधिकारियों का कर्तव्य है कि दुर्घटना के बाद इंशोरेंस कंपनी को जानकारी दें और ससमय रिपोर्ट जमा करें ताकि पीड़ित को समय पर मुआवजा मिल सके। उन्होंने चिंता जाहिर की कि कई मामलों में मुआवजा दिलाने में अनावश्यक देरी हो रही है और गांव के लोग इन लंबित मामलों से अनभिज्ञ रहते हैं। मुआवजा राशि का उद्देश्य पीड़ित परिवारों को रोजगार और जीवनयापन के लिए मदद देना है, और इसे सुनिश्चित करने के लिए पुलिस और इंशोरेंस कंपनियों का सहयोग महत्वपूर्ण है।
प्रोबेशन डीएसपी आकाश भारद्वाज ने भी कार्यशाला में अपनी बात रखते हुए पुलिस अधिकारियों से मुआवजा प्रक्रिया में अपनी भूमिका को पूरी निष्ठा से निभाने की अपील की। कार्यशाला का संचालन एलएडीसी अंकित कुमार सिंह ने किया और इसमें रिसोर्स पर्सन के रूप में अधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम पर अपने विचार रखे। कार्यशाला का समापन डालसा सचिव उत्तम सागर राणा ने धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया।